लाइफस्टाइल

स्वामी विवेकानंद जयंती आज, देश मना रहा युवा दिवस, जाने उनके बारे में विशेष बातें

हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand) जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है. 12 जनवरी 1863 में जन्मे स्वामी जी का नाम नरेंद्र नाथ दत्त था. उनके पिताजी प्रख्यात वकील थे. कॉन्वेंट में पढ़े स्वामी जी बचपन से ही काफ़ी जिज्ञासु थे और उनकी इसी जिज्ञासा ने उन्हें ईश्‍वर को समझने व सनातन धर्म को जानने की दिशा में आगे बढ़ाया।

Read Also – रोज करें हनुमान चालीसा का पाठ, सेहत के लिए भी है ऐसे फायदेमंद

शिकागो में दिया उनका भाषण आज भी सबके बीच प्रसिद्ध है, जहां उन्होंने भारत व सनातन धर्म का इतनी संवेदनशीलता व गहराई से प्रतिनिधित्व किया था कि हम सब आज भी गौरवांवित महसूस करते हैं. स्वामीजी ने ही दुनिया को बताया था कि असली भारत, यहां की संस्कृति और सभ्यता दरअसल क्या है.

रामकृष्ण परमहंस के इस प्रिय शिष्य ने हमें धर्म को देखने का एक नया व वैज्ञानिक नज़रिया दे दिया. यही वजह है कि उनका नाम आते ही हम एक अलग ही अनुभूति से गुज़रते हैं. उनके जन्मदिवस को युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है।

Read Also – Makar Sankranti 2021 – जानें कब है मकर संक्रांति, शुभ मुहूर्त एवं महत्व

स्वामी विवेकानंद के विचार –

उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये.
ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं. वो हम ही हैं जो अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है!
अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है.
उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो, तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो, तुम तत्व नहीं हो, ना ही शरीर हो, तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो.
खुद को कमज़ोर समझना सबसे बड़ा पाप है.
कभी मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है. ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है. अगर कोई पाप है, तो वो ये कहना कि तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल हैं.
उस व्यक्ति ने अमरत्व प्राप्त कर लिया है, जो किसी सांसारिक वस्तु से व्याकुल नहीं होता.
एक शब्द में, यह आदर्श है कि तुम परमात्मा हो.

Related Articles

Back to top button