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सौंदर्य प्रसाधन सामग्री बनाने वाली कंपनिया कर रही है बेसब्री से बबुल की नए फसल का इन्जार


बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में बबुल के पेड़ो की कमी नहीं है पर बबुल बेहद उपेक्षित किसी काम का नहीं माना जाने वाला पेड़ है, लेकिन अब यही बबुल भरपूर मेडिशनल प्रॉपर्टीज के दम पर दवा बनाने वाली इकाइयों में पहुंच बना रहा है। सौंदर्य प्रसाधन सामग्री बनाने वाली कंपनियों में भी बेसब्री से प्रतीक्षा की जा रही है इसकी नई फसल की, जो चालू माह के अंत तक बाजार में आ सकती है।

अनुसंधान में बबूल बीज में एंटीफंगल, एंटीऑक्सीडेंट के तत्व मिले हैं। दर्द निवारक के काम में भी मदद ली जा सकती है। डायरिया और मलेरिया जैसी बीमारियों को रोकने में सक्षम है। एंटीकैंसर और एंटीअल्सर जैसे अति महत्वपूर्ण गुणों के खुलासे के बाद बीज की खरीदी करने के लिए दवा बनाने वाली इकाईयां तैयार हैं।

इसके बाद से ही पशु आहार बनाने वाली इकाईयों को इस बरस बबूल बीज की खरीदी के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी क्योंकि औषधिय गुणों की पहचान के बाद औषधि उत्पादन करने वाली इकाईयां नई फसल का बेसब्री से इंतजार कर रहीं हैं। सौंदर्य प्रसाधन सामग्री बनाने वाला क्षेत्र अलग से प्रतीक्षा में है। छाल, पत्तियों और फूलों में भी अनुसंधान सफल रहा। पत्तियों और फूलों का सेवन दांत दर्द और छाला खत्म करने के लिए प्राकृतिक उपाय माने जा रहे हैं। शारीरिक कमजोरी दूर करने में भी यह भरपूर मदद करता है। छाल में जो गुण मिले हैं, उसके बाद कॉस्मेटिक इंडस्ट्रीज में इसकी मांग इस बार बढ़ते क्रम पर है।

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वैसे तो बबूल आर्युवेद का अत्यंत महत्वपूर्ण वृक्ष है l इसकी पत्तियां, फल, छाल, पुष्प, जड़ एवं गोंद सब बेहद उपयोगी है एवं अलग-अलग औषधियों में प्रयुक्त होती है l अपने अद्भुत लाभों के अलावा यह पोषक तत्व, विटामिन और खनिजों का एक अच्छा स्रोत है l

4 से 47 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी हरा-भरा रहने वाला बबूल, दोमट और काली मिट्टी से भरपूर भूमि पर बढ़िया विकास करता है। सर्दियों में इसमें फलियां लगती हैं, जो ग्रीष्म काल के महीनों में परिपक्व हो जाते हैं। फलियों की लंबाई 7 से 8 इंच होती है। परिपक्वता अवधि के बाद गिरने पर संग्रहण के जरिए इसकी बाजार तक पहुंच तय होती है।



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