झीरम नक्सली हमले में मारे गए नेताओं के परिजनों ने कांग्रेस भवन में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए बड़ा आरोप लगाया है. परिजनों ने कहा कि झीरम हमला बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र था. जिसमें लीपापोती हुई है. एनआईए ने गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ नहीं की. जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है. एनआईए राजनीतिक लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है. जबकि राज्य सरकार एसआईटी जांच करना चाहती है, लेकिन एनआईए राज्य सरकार ने फाइल नहीं सौंप रही है.
षड़यंत्र की जांच नहीं हुई
पूरा छत्तीसगढ़ जानता है कि इस नरसंहार के पीछे कोई बड़ा राजनीतिक षडयंत्र था।
लेकिन आश्चर्य और दुख का विषय है कि न तो एनआईए ने इस षडयंत्र की जांच की और न आयोग के जांच के दायरे में षडयंत्र को रखा गया।
एनआईए ने तो इस तरह जांच की है कि मानों यह कोई साधारण नक्सली हमला था।
न तो सभी संबंधित पक्षों के बयान लिए गए और न ठीक तरह से गिरफ़्तारियां की गई।
आयोग में जो सुनवाई चल रही है, उसमें ठीक तरह से पता चल रहा है कि किस तरह से जानबूझ कर सुरक्षा व्यवस्था को कमज़ोर किया गया। जब विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने षडयंत्र की जांच का मामला विधानसभा में उठाया तो मजबूर होकर सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।
लेकिन केंद्र की सरकार ने सीबीआई जांच करने से इनकार कर दिया। लेकिन यह जानकारी रमन सिंह जी छिपाते रहे और प्रदेश की जनता को कभी नहीं बताया कि केंद्र ने सीबीआई जांच करवाने से इंकार कर दिया है।
हमारे पास सबूत हैं
हम परिजन ठीक तरह से समझ पा रहे हैं कि षडयंत्र की जांच नहीं की जा रही है।
एनआईए ने अपनी जांच पूरी होने की घोषणा कर दी थी लेकिन पूरे सबूतों की जांच नहीं की थी।
जब राज्य सरकार ने एसआईटी गठन की घोषणा की तब एनआईए ने फिर से खानापूर्ति शुरु की है. एक इंस्पेक्टर को तैनात करके हमें भुलावा दे रहे हैं कि जांच हो रही है।
एनआईए ने तो गिरफ़्तार किए गए लोगों से भी ठीक तरह से पूछताछ नहीं की।
हमारे पास पर्याप्त सबूत हैं जो बताते हैं कि झीरम नरसंहार के पीछे गहरा षडयंत्र है।
लेकिन हमें लगता है कि एनआईए राजनीतिक आकाओं के इशारे पर काम कर रही है और कुछ लोगों को बचाना चाहती है।
इसीलिए वह षडयंत्र की जांच नहीं करना चाहती।
वह हमसे कह रही है कि हम अपने सबूत उन्हें सौंप दें लेकिन हमें एनआईए पर अब भरोसा नहीं रहा।
हमारी ओर से हाईकोर्ट में भी एक याचिका लगाई गई है।
ठीक तरह से जांच के लिए हमने दरभा में नए सिरे से एफ़आईआर की गई है। लेकिन अब एनआईए उसे भी अपने हाथ में लेना चाहती है।
हम चाहते हैं कि राज्य सरकार की एसआईटी को ही जांच करने दिया जाए जिससे षडयंत्र का पता चल सके और हमें न्याय मिल सके।
न्याय पाना हमारा हक़ है और हमारा हक़ छीनकर हमारा दुख लगातार बढ़ाया जा रहा है।




