बीजापुर में 3 मार्च को हुई मुठभेड़ के संबंध में प्रेस नोट जारी कर जानकारी सार्वजनिक की और जवान के संबंध में भी अपना प्रेस नोट में उल्लेख किया है। प्रेस नोट में नक्सलियों का दावा किया है कि मुठभेड़ में चार पीएलजीए सदस्यों (माओवादियों) ने जान गंवाई है। इसमें ओड़ी सन्नी, पदाम लखमा, कोवासी बदरू और नूपा सुरेश के नाम की पुष्टि की गई है। नक्सलियों के अनुसार 2000 की संख्या में पुलिस बल अप्रैल 3 को बड़ा हमला करने के लिए जीरागुडेम गांव के पास पहुंचे थे, जिस पर पीएलजीए ने हमला किया है। नक्सलियों के मुताबिक मुठभेड़ में सुरक्षाबलों के 24 जवानों को नुकसान पहुंचाया गया है। वहीं 31 जवान घायल हुए इस दौरान एक जवान बंदी के रूप में मिला।
मुठभेड़ के बाद बंदी बनाए गए कोबरा के जवान की रिहाई को लेकर उहापोह की स्थिरी बनी हुई थी, जिस पर दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी प्रवक्ता विकल्प ने अपना स्पष्टीकरण दिया है और नक्सलियों ने मध्यस्थता के लिए सरकार को नाम देने की बात कही है। प्रेस नोट में कहा गया है कि सरकार पहले निर्दिष्ट रूप से मध्यवर्तियों के नाम की घोषणा करे। उसके बाद हमारे पास बंदी के रूप में रहा पुलिस को सौंप देंगे, तब तक वह जनताना सरकार की सुरक्षा में सुरक्षित रहेगा।

नक्सलियों द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा है कि वार्ता के लिए हम कभी भी तैयार हैं सरकार ईमानदार नहीं है। पूर्व में हुए वार्ताओं में सशस्त्र संघर्ष करने वाला कभी भी हथियार नहीं छोड़ा था। वार्ता करने के लिए अनुकूल माहौल बनाने का जिम्मा सरकार का है। पुलिस बलों का एकत्रित करना, कैम्प बनाना, हमला करना और दमन चलाना जैसे कामों को रोक देने से वार्ता हो जाता है। ऐसा न करके कोंडागांव, नारायणपुर, बीजापुर जिलों में सैनिक अभियान चल रहा है। आत्मरक्षा के रूप में प्रतिहमला करना पड़ रहा है। सभी आंदोलनों को सीपीआई (माओवादी) नेतृत्व देते हुए, उन आंदोलनों को मिलटेंट के रूप में आगे बढ़ा रही है।





