
दिल्ली। गुरुवार कोर्ट ने आयुर्वेदिक दवा कोरोनिल के बारे में गलत प्रचार से रामदेव को रोकने के संबंध में डीएमए ने जो अर्ज़ी दायर की थी उस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अगर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो आयुष मंत्रालय इस मामले को देखेगा. हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर डीएमए का दावा मान भी लिया जाए कि कोरोनिल के बारे में झूठा प्रचार या दावा किया गया तो इससे डीएमए पर क्या प्रभाव पड़ता है.
कोर्ट ने साफ कहा कि यदि नियम का उल्लंघन हुआ है तो मंत्रालय को इस बारे में तय करना है।दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा, ‘क्या एलोपैथी इतना कमज़ोर साइंस है कि किसी के बयान देने पर कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दी जाए? एलोपैथी इतना कमज़ोर पेशा नहीं है. आप लोगों को कोर्ट का समय बर्बाद करने के बजाय महामारी का इलाज खोजने में समय लगाना चाहिए।
दोनों पक्षों को सुनकर हाई कोर्ट ने रखी अपनी बात
आपको बता दे कि कोर्ट में DMA ने दलील रखी कि कोरोनिल को कोई सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ इसलिए जब तक सर्टिफिकेट नहीं मिल जाए इसे इलाज के तौर पर पेश न किया जाए.. रामदेव को आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशित करने से रोका जाए. कोर्ट ने कहा, ‘वो तो पहले ही इंटरनेट पर है.’ कोर्ट ने पूछा कि आप क्या चाहते हैं तो DMA ने कहा कि रामदेव बिना शर्त माफी मांगेजवाब में बाबा रामदेव के वकील ने कहा कि DMA ने आयुष मंत्रालय के बयान के बाद कोर्ट का रुख किया. कोर्ट ने कहा कि यह कहना भी कोर्ट का काम नहीं है कि कोरोनिल का इलाज सही है या नहीं, यह विशेषज्ञों का मामला है।




