30 लाख लोगों को समय पर नही मिल पाता खून, जानिए क्यों विश्व रक्तदान दिवस जाता है मनाया
देश की मात्र एक फीसद आबादी अगर रक्तदान करे तो उस देश को कभी रक्त की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा
पूरी दुनिया में हर साल करीब 10 करोड़ लोग रक्तदान करते हैं। इनमें से आधे रक्तदाता विकसित देशों से होते हैं। मतलब भारत समेत अन्य विकासशील देशों में रक्तदान के प्रति लोगों में जागरूकता कम है। भारत में हर साल बीमारियों या गंभीर दुर्घटनाओं में घायल लोगों को करीब एक करोड़ बीस लाख यूनिट खून की जरूरत पड़ती है। इसमें से मात्र 90 लाख यूनिट रक्त ही उपलब्ध हो पाता है और करीब 30 लाख लोगों को समय पर खून नहीं मिल पाता है।
आंकड़ों के अनुसार रक्तदान के प्रति छोटी सी जागरूकता इस समस्या को पूरी तरह से खत्म कर सकती है। किसी भी देश की मात्र एक फीसद आबादी अगर रक्तदान करे तो उस देश को कभी रक्त की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
आपको बता दें कि विश्व रक्तदान दिवस, शरीर विज्ञान में नोबल पुरस्कार प्राप्त कर चुके वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन की याद में पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य रक्तदान को प्रोत्साहित करना और उससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है। इसी दिन 14 जून 1868 को वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन का जन्म हुआ था।
उन्होंने इंसानी रक्त में एग्ल्युटिनिन की मौजूदगी के आधार पर ब्लड ग्रुप ए, बी और ओ समूह की पहचान की थी। खून के इस वर्गीकरणम ने चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसी खोज के लिए कार्ल लैंडस्टाईन को सन 1930 में नोबल पुरस्कार दिया गया था।
भारत रक्तदान में भले ही बहुत पीछे है, लेकिन यहां भी लोगों में तेजी से जागरूकता बढ़ रही है। पंजाब और मध्य प्रदेश रक्तदान के मामले में देश में सबसे आगे हैं। तंजानिया में 2005 में स्वैच्छिक रक्तदान मात्र 20 फीसद था जो 2007 में बढ़कर 80 फीसद पहुंच गया था। ब्राजील में रक्तदान या अन्य मानव अंग अथवा ऊतकों के लिए रुपये लेना या कोई मुआवजा लेना गैर-कानूनी है।
गौरतलब है कि भारत में एक लाख से ज्यादा थैलिसिमिया के मरीज हैं, जिन्हें बार-बार खून बदलने की जरूरत पड़ती है। भारत में प्रति एक हजार लोगों में से मात्र आठ लोग ही स्वैच्छिक रक्तदान करते हैं। भारत में हर साल लगभग 10 हजार बच्चे थैलिसिमिया जैसी बीमारी के साथ पैदा होते हैं। इनमें से कई बच्चों की वक्त पर खून न मिलने की वजह से मौत हो जाती है।
इसके अलावा दुनिया के 60 देशों में 100 प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदान होता है। यहां लोग खून देने के बदले पैसे नहीं लेते। दुनिया के 73 देशों में मरीजों को खून के लिए करीबीयों या खून बेचने वालों पर निर्भर रहना पड़ता है। भारत इनमें से एक है।



