
कोरोना महामारी से कुछ राहत मिली है, तो डेंगू का डंक मुश्किल में डालने लगा है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में इन दिनों डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। राजधानी में नगर निगम की टीम घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही है। अन्य शहरों में हर संभव उपाय के दावे किए जा रहे हैं। कूलर में जमा पानी खाली कराया जा रहा है। अभियान चलाकर डेंगू को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। स्वास्थ्य और नगर निगम अमले को कुछ हद तक सफलता मिल रही है, लेकिन और सजगता और सक्रियता की दरकार है।
तीन साल पहले भिलाई और दुर्ग में डेंगू के कहर को नहीं भूला जा सकता। इस्पात नगरी में हजारों की संख्या में लोग बीमार हुए, जिनमें ढाई सौ से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। मामला विधानसभा तक पहुंचा और राज्य सरकार को तब डेंगू को महामारी घोषित करना पड़ा था। पीड़ितों का निजी अस्पतालों में भी निश्शुल्क उपचार हुआ। प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक स्वास्थ्य महकमे को आपातकाल जैसी स्थिति में काम करना पड़ा। वैसे ही हालात फिर न बनें, इसके लिए सजगता, सक्रियता और सभी की सहभागिता जरूरी है।
यह बहुत स्पष्ट है कि सिर्फ सरकार के भरोसे डेंगू से नहीं निपटा जा सकता। आमजन अपने आसपास पानी जमा नहीं होने दें, यही शासन और सरकार का सहयोग होगा। घरों के अंदर कूलर और अनुपयोगी सामानों में जमा पानी डेंगू मच्छरों का प्रजनन केंद्र बन जाता है और पूरा परिवार बीमारी की चपेट में आ जाता है। रायपुर से लेकर बस्तर और बिलासपुर से सरगुजा तक डेंगू फैलने की खबरें आ रही हैं। यह भी सवाल है कि हर बार डेंगू के मरीज मिलने के बाद ही प्रशासन की तरफ से सक्रियता आखिर क्यों बढ़ाई जाती है? डेंगू को पनपने का मौका ही क्यों दिया जाता है?
आमजन भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताई गई सावधानियों को जागरूकता के अभाव में जीवन में आत्मसात नहीं करते। राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में निजी अस्पताल खोलने की योजना बनाकर स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने का फैसला किया है। इससे डेंगू समेत अन्य बीमारियों का लोगों को समय रहते इलाज मिल सकेगा। कोरोना काल में भी सरकार ने हर संभव कोशिश की कि लोगों का जीवन सुरक्षित हो। दूसरी लहर विकराल थी, लेकिन संसाधन जुटाकर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं दी गईं
डेंगू से भी निपटने के लिए वनांचल क्षेत्र बस्तर, जशपुर और अंबिकापुर क्षेत्र में सर्व सुविधायुक्त अस्पताल, संसाधन और डॉक्टरों की व्यवस्था की जा रही है। रायपुर, भिलाई-दुर्ग, राजनांदगांव, बिलासपुर, बस्तर, सरगुजा समेत कई जिलों के सरकारी अस्पतालों को और सुविधाएं देने की आवश्यकता है। चिकित्सकों के साथ पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की भर्ती होनी चाहिए




