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महाशिवरात्रि पूजा 2021 – भगवान् शंकर को भूलकर भी न चढ़ायें ये चीजें, जानें शुभ मुहूर्त

भगवान शंकर को पूजा जाने वाला महापर्व महाशिवरात्रि आने वाली है. महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विधान है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव का विवाह माता पार्वती से हुआ था. शिवरात्रि पर भगवान शिव की विधिवत रूप से पूजा-अर्चना की जाती है।

महाशिवरात्रि पूजा 2021 शुभ मुहू्र्त

महाशिवरात्रि तिथि: 11 मार्च 2021
महाशिवरात्रि निशिता काल: 11 मार्च रात 12:06 से लेकर 12:55 तक

अवधि: 48 मिनट

महाशिवरात्रि प्रथम प्रहर: 11 मार्च शाम 06:27 से लेकर 09:29 तक
महाशिवरात्रि द्वितिय प्रहर: 11 मार्च रात 09:29 से लेकर 12:31 तक
महाशिवरात्रि तृतीय प्रहर: 11 मार्च रात 12:31 से लेकर 03:32 तक
महाशिवरात्रि चतुर्थ प्रहर: 12 मार्च सुबह 03:32 से लेकर 06:34 तक
महाशिवरात्रि व्रत पारण समय: 12 मार्च सुबह 06:34 से लेकर शाम 03:02 तक

भगवान शिव को भूलकर भी न अर्पित करें ये 5 चीजें

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को भूलकर भी तुलसी नहीं चढ़ाना चाहिए. हालांकि, तुलसी का हर तरह की पूजा में इस्तेमाल किया जाता है. तुलसी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है लेकिन तुलसी को भगवान शिव पर नहीं चढ़ाया जाता. भगवान शिव को पूजा में केवल बेलपत्र चढ़ाना चाहिए. तुलसी माता का संबंध भगवान विष्णु से है इसलिए उन्हें तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए.

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा अगर करें तो टूटे हुए अक्षत भूल से भी न चढ़ाएं. ऐसा माना जाता है कि टूटा हुआ चावल चढ़ाना पूरी तरह से अपूर्ण और अशुद्ध होता है इसलिए ये भगवान शिव को नहीं चढ़ाया जाता है.

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महाशिवरात्रि के दिन शिव उपासना में शंख का इस्तेमाल करना वर्जित माना गया है. इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है. भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था, जो भगवान विष्णु का ही भक्त था. शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है. इसलिए शिवजी की पूजा में शंख का प्रयोग नहीं करना चाहिए.

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शंकर को कुमकुम नहीं चढ़ाना चाहिए. कुमकुम सौभाग्य का प्रतीक होता है जबकि भगवान शंकर वैरागी हैं इसलिए शिव जी को कुमकुम नहीं चढ़ाना चाहिए. इसके अलावा शिवलिंग पर हल्दी भी न चढ़ाएं.

महाशिवरात्रि के दिन शिव आराधना के समय शिवलिंग पर नारियल पानी से अभिषेक नहीं करना चाहिए. नारियल देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है, जिनका संबंध भगवान विष्णु से है.

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