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विशेष लेख – उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के बयान के बाद मचा हाहाकार, यूनिफॉर्म तो पहचान है व्यक्तिगत की

बहुत दिनों से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री जी के बयां के बाद इस पर हाहाकार मच गया।  पर वस्त्र की अहमियत क्या है यह हर के जीवन का अभिन्न अंग तो रहा ही है । कहीं शायद इससे इंकार भी कर सकते है।  हर कोई छात्र  रहा है  तो मै उस स्कूल के छात्रो के यूनिफार्म से शुरू करता हू । यह हो सकता है कि हर स्कूल के अलग अलग हो पर यूनिफार्म से हर बंदे को गुजरना पडता है । यह यूनिफार्म ही लोगों को अपनी पहचान बनाती है । यही कारण है कि भगवा वस्त्र मे साधु लोगों को मार मार कर हत्या का कारण भी यह भगवा कलर बना जो उनहे उनकी पहचान बता रहा था । अब क्या कारण है वो जांच के गर्भ मे है ।  देश के रक्षा मे तैनात तीनों अंगों  के सेनाओं की करूंगा सबसे पहले सफेद हमारी नौ सेना का है वहीं हल्का नीला हमारे वायुसेना के है और थल सेना का वहीं परंपरागत सैन्य कलर रहता है । वहीं खांकी वर्दी जो हमारे आंतरिक कानून वयवस्था बनाए रखने का काम करती है यह पोलिस का ड्रेस रहता है । वहीं नीली फुलपेंट और सफेद शर्ट यातायात पुलिस का रहता है।  चलो आगे बढे हमारे स्वास्थय की रक्षा करने वाले चिकित्सक जो सफेद एप्रन मे दिखते है ।  वहीं सिस्टर्स लोगों का कहीं सफेद सकरट या कही कही सफेद साडियों मे भी रहते है । फिर आगे बढे  न्यायालय मे काले कोट मे हमारे वकील साहब और साहबान नजर आते है । फिर इसी काले कोट मे ट्रेन मे टी टी नजर आते है । वहीं स्टेशन मे ही अपने उपर लाल सुर्ख का बंडी पहने और उसका चमकता बिलला कुली उसकी पहचान बताता है । वहीं  बसो मे आटो मे टैक्सी में खांकी कलर का कोट इससे संबंधता है यह दर्शाता है  । वहीं गैरेज मे नीले कपडों मे काम करने वाले को लोग मिस्त्री की पहचान अपने आप हो जाती है । वहीं बडे लोगों के कार के चालक सफेद वस्त्रों मे दिखते हैं।  साहब जब कोई बैंड पार्टी एक कलर मे बांहों मे हथेलियों मे झालर से बने और सिर पर कैप काफी प्रभाव शाली लगती है । वहीं पायलट के सफेद वस्त्र और एयरहोसटेस के अपनी कंपनी के मुताबिक यूनिफार्म काफी आकर्षक लगता है । वहीं स्वास्थय विभाग की हरी साडियो मे मितानिन यह हमारे जमीनी स्तर पर काम करने वाले हेल्थ वर्कर रहते है । पहले ही साधुओं के लिए लिखा वहीं हमारे गिरजाघरों के पादरी या फादर अपने सफेद वस्त्रों मे प्रभावशाली शख्सियत के  मालिक लगते है।  वहीं नन लोगों की भी अपनी अलग पोशाक रहती है । आजकल बडे स्टोर्स में भी काम करने वाले कर्मचारियों का ड्रेस बना दिया गया है।  वहीं बडे होटलों के शेफ बैयरै भी उनकी पहचान बनाते है।  बस इसमें आखिर पर कोई ड्रेस नहीं पर इसको पहनकर अलग दिखने की एक कोशिश जिस पर दुर्भाग्य से लोगों को विश्वास नहीं है  पर यही हमारे लोकतंत्र के नुमाइंदा रहते हैं यही लोग देश प्रदेश चलाते है । यही लोग कानून बनाते है । सफेद पायजामा सफेद कुर्ते और फिर दल मुताबिक टोपी का कलर ।  यही टोपी इनकी दलीय पहचान बनती है । यह वस्त्र यह ड्रेस  जब सत्ता में रहते है तो पूरा मीडिया  और सत्ता के गलियारों में घूमने वाले सब इनके आगे पीछे घूमते रहते है । नेता कहते लगते है फिर वह पार्षद ही क्यो न हो । कुल मिलाकर यह वस्त्र  और यूनिफार्म  पहचान और शख्सियत बताती है यह कपडों की महत्ता है ।  बस इतना ही डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ

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