RBI Repo Rate: रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, रेपो रेट 5.25% पर स्थिर; जानें आपकी EMI पर क्या होगा असर

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा (Photo Credits: PTI)
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) यानी आरबबीआई (RBI) ने बुधवार, 8 अप्रैल 2026 को अपनी मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) (MPC) की बैठक के परिणामों की घोषणा की. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा (RBI Governor Sanjay Malhotra) ने ब्याज दरों में कोई बदलाव न करते हुए रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है. इसके साथ ही स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट 5.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रहेगा. यह लगातार सातवीं बार है जब केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दरों में ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बनाए रखी है. यह भी पढ़ें: RBI Monetary Policy: GST कट के बाद एक और तोहफा? आपकी लोन की EMI पर RBI आज करेगा बड़ा ऐलान
आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत
गवर्नर ने संबोधन के दौरान बताया कि फरवरी तक के हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स आर्थिक गतिविधियों में निरंतर मजबूती का संकेत दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि मजबूत निजी खपत और निवेश की स्थिर मांग देश की विकास दर को गति दे रही है. इसके अलावा, जीएसटी युक्तिकरण (GST Rationalization) और सेवा क्षेत्र में उछाल से शहरी खपत में और सुधार होने की संभावना है.
वैश्विक अनिश्चितताएं और चुनौतियां
भले ही घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत दिख रही हो, लेकिन आरबीआई ने वैश्विक स्तर पर चल रहे तनावों को लेकर आगाह किया है. गवर्नर मल्होत्रा ने चेतावनी दी कि वैश्विक संघर्षों की तीव्रता और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को होने वाला नुकसान महंगाई और विकास दर दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है.
विशेष रूप से कच्चे तेल की ऊँची कीमतों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में होने वाले संभावित व्यवधानों को लेकर चिंता जताई गई है, जो आयातित मुद्रास्फीति को बढ़ा सकते हैं और चालू खाता घाटे (CAD) को प्रभावित कर सकते हैं. यह भी पढ़ें: रेपो रेट में कटौती से सस्ती हुई Home Loan EMI, ये बैंक दे रहे सबसे कम ब्याज पर होम लोन
विकास दर और भविष्य का अनुमान
आरबीआई गवर्नर ने साझा किया कि संशोधित जीडीपी श्रृंखला के तहत पिछले वर्ष की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत आंकी गई है. उन्होंने कहा कि हालांकि वैश्विक विकास की धीमी संभावना बाहरी मांग को कम कर सकती है, लेकिन भारत का बिजनेस सेंटीमेंट अभी भी सकारात्मक बना हुआ है. सरकार ने प्रमुख क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं को रोकने के लिए कई सक्रिय कदम उठाए हैं.




