पश्चिम बंगाल – राजनीति करने वालों का नैतिक दायित्व है कि यहां के सांस्कृतिक मूल्यों को कायम रखना चाहिए
पश्चिम बंगाल में जो हो रहा है या जो अभी तक हुआ है।
वो कहीं भी बंगाल के सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप नहीं है। बंगाल जहां से आजादी की लडाई का आगाज हुआ। जहां क्रांतिकारी के तीन पुरोधा लाल बाल पाल मे पाल ( विपिन चंद्र पाल ) बंगाल के थे । यह वो जगह है जहां से शहीद खुदीराम बोस का संबंध है। वहीं शायद ही लोगों को पता हो कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री भी बंगाल से हुए । वो थे आजाद हिन्द फौज के सेनापति नेताजी सुभाषचंद्र बोस। आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी और देश में राज कर रही भाजपा जो पूर्व मे जनसंघ थी उसके संस्थापक भी शहीद श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी यहीं के थे । यह मैंने बंगाल का छोटा सा राजनीतिक परिचय कराया। अब मै आध्यात्मिक क्षेत्र मे बंगाल के बारे मे चर्चा करू तो यह मां दुर्गा की धरती है । पर परमहंस रामकृष्ण जी की चर्चा के बगैर यह बात अधूरी रह जाती। स्वामी रामकृष्ण परमहंस और मां शारदा से कौन अपरिचित है। पूरा बंगाल इनके आध्यात्म से अभिभूत है । फिर इन्ही रामकृष्ण परमहंस के शिष्य नरेन्द्र जो स्वामी विवेकानंद जी के नाम से प्रसिद्ध हुए। स्वामी विवेकानंद जी ने भारत के आध्यात्म से पश्चिमी देशों को परिचित कराया। उनका शिकागो में दिया गया व्याख्यान आज भी अमेरिका के साथ विश्व को याद है। फिर इसी धरती पर योगी अरविंद भी हुए। पहले क्रांतिकारी बाद में इनहोने आध्यात्म पर अलग जलाई । यह तो कुछ परिचय है । इस देश के राष्ट्र गीत वंदेमातरम के रचयिता बंकिमचन्द्र चटर्जी जी बंगाल के थे । बहुत बडे साहित्यकार रहे है । वहीं राष्ट्रगान के रचयिता रविन्द्र नाथ टैगोर जी भी यहीं के है । नोबेल पुरस्कार विजेता टैगोर ने यहां ही रहकर देश सेवा की है। आज भी उनका शांति निकेतन शिक्षा पर बहुत अच्छा काम कर रहा है। शरदचंद्र , विमल मित्र ,काजी नजरूल इस्लाम ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता आशापूर्णा देवी पद्म विभूषण महाशवेता देवी जैसे साहित्यकार यही से है ।अब मै फिल्म पर आऊ तो यहां पर सत्यजीत राय मृणाल सेन बासु भट्टाचार्य हृषिकेश मुखर्जी शक्ति सामंत आदि प्रसिद्ध फिल्म कार जिनकी फिल्म ने इतिहास रचा सब यही के रहे है । हेमंत दा का संगीत और उनकी आवाज़ का पूरा देश दीवाना है । वहीं यहां का रविन्द्र संगीत तो विश्व प्रसिद्ध हैं। इस क्षेत्र को यही विराम दूंगा । वहीं डाक्टरस डे भी विधान चंद्र राय के जन्मदिन पर ही मनाया जाता है। जो बंगाल के मुख्यमंत्री भी रहे हैं। खेलों में बंगाल फुटबाल के ज्यादा शौकीन रहे है । यहां की दो प्रसिद्ध टीम मोहहमडन क्लब , मोहन बागान जैसे टीम यहां की है । फिर आज बीसीसीआई के अध्यक्ष भारत क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली भी यहीं के है । वहीं विज्ञान मे जगदीश चंद्र बसु को नोबल पुरस्कार मिला था। वहीं अर्थ शास्त्री अमरतय सेन को भी नोबल पुरस्कार मिला। वहीं यहां की सेवा के लिए मदर टेरेसा को भी नोबल पुरस्कार मिला था और सैंट भी घोषित हुई । मैंने यह बहुत ही संक्षेप मे यहां के बारे में बताया । पर राजनीति के खातिर इन दलों ने और इन नेताओं ने इस धरा को जहां रक्त रंजित किया वही यहां के सौहार्द्र पूर्ण वातावरण को खराब किया। तृणमूल कांग्रेस के पहले लेफ्ट की सरकार ने भी अपने राजनीतिक हितों के लिए जो माहौल खडा किया था करीब करीब तृणमूल कांग्रेस भी उसी राहों में ही चलते दिखाई दे रही है। क्यो हम अपने देश में चुनाव जीतने के लिए बांग्ला देशी घुसपैठिया को पनाह देकर और रोहिंगया को बसा कर धर्मनिरपेक्षता के नाम से अपनी राजनीतिक मकसद को पूरा करते रहेंगे और अस्थिरता का माहौल बनाते रहेंगे। कितना दुखद है कि सत्ता में रहने के लिए यह परिस्थिति निर्मित करना दुखद है। राजनीति में जब भी सत्ता परिवर्तन दिखता है तो यह हथकंडे अब आम होते दिखाई दे रहे हैं। इन्हे यह मतलब नहीं कि किसी की जान जा रही है। सत्ता न जाये यह बड़ा मकसद रहता है। यहां पर किसी की भी सरकार आये जाये पर यहां की सांस्कृतिक ऐतिहासिक आदि विरासतों के अक्षुण्णता कायम रहनी चाहिए। सरकारें तो आते जाती रहनी है । यह राजनीति करने वालों का नैतिक दायित्व है कि यहां के सांस्कृतिक मूल्यों को कायम रहना चाहिए। बस इतना ही
डा .चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ




