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लेख – आज की पीढ़ी को अकबर महान तो मालूम है पर अपने वतन के लिए लडने वाले घास-फूस की रोटी खाने वाले महाराणा प्रताप से आज अंजान है

आज डा वाघ की वाल से अपनी बात पर इस देश मे कुछ लोग बेवजह के मुद्दे उठाकर अपने को चर्चा मे बनाए रखना चाहते है ।  इन लोगो को विशेषकर सन दो हजार चौदह के बाद मोदी जी के सत्ता मे आने के बाद बहुत ज्यादा तकलीफ होने लगी है । एक तो इनके विचारधारा वालो ने तो पहले ही अपने मन माफिक धर्म के आधार पर पाकिस्तान बनवा लिया । वही यह विचार वाले सौभाग्य शाली थे कि धर्म निरपेक्षता का झुनझुना थमा कर इन लोगो के विचार वाली ही सरकार थी तो इनकी तो बल्ले बल्ले ही थी । दुर्भाग्य से बहुसंख्यक समाज देश विभाजन के समय भी ठगा गया ।  वही अशिक्षा के चलते और स्वतंत्रता संग्राम मे सिर्फ कुछ परिवार के गुणगान की घूटी के नाम से और अल्पसंख्यक का कार्ड खेलकर इन लोग सत्ता मे ही बने रहे ।  ऐसे स्थिति मे इन तथाकथित लोगो का बोल बोला था । यही कारण है कि भारत मे इन लोगो ने मुगल शासको का  जहां महिमा मंडित किया । वही इन लुटेरे क्रूर शासको के नाम से धडल्ले से रोड और शहरो के नाम तक रख दिए।  वही इन लोगो ने वो झूठा इतिहास तक पढाने की भी हिमाकत की । यही कारण है कि आज की पीढ़ी को अकबर महान तो मालूम है पर वास्तविकता यह है कि अपने देश को अपने वतन के लिए लडने वाले घास-फूस की रोटी खाने वाले महाराणा प्रताप से आज अंजान है । बस ऐसे तथाकथित लेखक और गीतकार को यह बाते सुविधाजनक लगती थी ।  क्योकि जिस विचार धारा की यह हिमाकत करते थे यह फल फूल रही थी । इन लोगो ने ही पूरे बालीवुड को अपने ऐजेंडे मे ढाल लिया था ।  यही कारण है कि ऐसे लोगो के चलते ही यहा के युवाओ के लिए बालीवुड मे जहां जगह नही थी । पर बालीवुड मे पाकिस्तान के कलाकारो को काम देकर यह लोग अपने ऐजेंडा को सफल बनाते रहे ।  पाकिस्तान के किसी भी आतंकवादी घटनाओ को इन्होने कभी भी खिलाफत नही की । यूपीए शासन मे आतंकवाद की घटनाओ पर इनकी चुप्पी ही इनके चरित्र को दर्शाती है ।  इन धर्मनिरपेक्ष लोगो के कारण ही बहुसंख्यक लोगो मे चेतना जागृत हुई है । इस चेतना को जागृत करने मे संघ परिवार की भूमिका व उनसे जुडे लोगो के परिवार की भूमिका बहुत अहम है । संघ ने अपने अनुशासित भूमिका के साथ इतना बडा नेटवर्क पूरे देश मे खडा किया । वहीं इस देश की संस्कृति व गौरवशाली इतिहास से परिचित कराया । विशेषकर अपने धर्म से जुडे रहने के लिए प्रेरित किया । वही इनके झूठे इतिहास का पर्दाफाश किया जो इनके लिए तकलीफ की यही बात है । उल्लेखनीय है कि कभी भी इन्होने किसी भी आतंकवाद घटनाओ पर रोष नही व्यक्त किया मोमबत्ती गैंग इतने लोगो के मुंबई मे शहीद होने के मोमबत्ती मार्च नही निकाला ।  पर वही इन लोग वही है जो अभी तक यह कहते नही अघाते थे कि आतंकवाद का कोई धर्म नही होता । वही षड्यंत्र पूर्वक भगवा आतंकवाद को गढने वालो को भगवा आतंकवाद दिखने लगा  ।  इन्हे इशरत जहां बिहार की बेटी दिखने लगी वही काश्मीर मे बुरहान बानी एक मास्टर का बेटा दिखने लगा । पर इन्हे गुजरात की घटना तो याद है पर उसका मूल कारण गोधरा मे बोगी को जलाकर मारने पर इनके मुंह मे दही जम जाता है चुप्पी साध लेते है । काश्मीर मे पंडित के उपर हुए पूरी कौम के साथ बेरहम हत्या पर मौन वही सिक्ख दंगो पर इनके मौन इनके दोगलापन को दिखाते है । आज ऐसी विचार धारा हाशिए पर आ गई है ।  वही देश संघ के जमीनी काम के कारण जागृत हुआ है यह इनके लिए व्यक्तिगत परेशानी का कारण है ।  इसीलिए ऐसे लोगो को देश मे रहने मे डर लग रहा है ।  यही लोग बताए कि आर एस एस का कौन से आतंकवादी घटनाओ मे हाथ है । वही जब यह लोकतंत्र पर इनकी आस्था है तो फिर लोगो की चुनी हुई सरकार और इनके जनप्रतिनिधि को यह कैसे कोस सकते है ।  इनका दुर्भाग्य है कि मोदी जी की अमित शाह जी की और योगी जी इस देश मे जहा प्रशंसक है वही इनका विकल्प दूर दूर तक विपक्ष मे दिखाई नही दे रहा है  ।  वही धर्मनिरपेक्षता के नाम से जो चूर्ण बेच रहे थे वो अब बिक नही रहा है ।  वही सोशल मीडिया के मजबूत होने से लोगो मे इनके लिए इतना रोष है जो अपने को हीरो कहते थे लोगो की जागरूकता ने जहां बहिष्कार कर इनकी दुकानो मे ही ताला ही लगवा दिया । वही इन कलाकार को अहसास करा दिया कि यह कोई हीरो नही सिर्फ भांड है । यह अपनी संस्कृति धर्म के लिए संघ द्वारा लाई जागरूकता इन्हे अब चुभ रही है । वही इनके विचार धारा वाले दलो और नेताओ के कारनामे भी इनके ऐजेंडा मे जहां पलिता लग रहा है वही मोदी जी का विकल्प न दिखाई देने के कारण से इन लोगो मे मानसिक दिवालियापन सा आ गया है । कोई कहता है कि योगी जी जीतेंगे तो उत्तर प्रदेश छोड दूंगा । इस भय से लोग खुश है ।  यही कारण है कि इस देश का सच इतिहास इन लोगो की जहां पोल खोल रही है ।  इनकी विचार अब समाज को ग्राह्य नही है ।  आज इन लोगो की यह अपील भी काम नही आ रही है कि अगर हमारी मूवी नही चली तो हम दिवालिया हो जाएंगे तो भी लोगो मे इनके लिए सहानुभूति बिल्कुल नही रह गई है । यही कारण है कि जिस थाली मे खाते है उसी मे छेद करते है काफी सच्चाई के करीब लोगो को लगने लगा था । वही सुशांत सिंह राजपूत केस ने भी आम लोगो को उद्वेलित किया । कुल मिलाकर इनके मुखौटे उतर गए है और आम लोगो ने इनकी औकात दिखा दी है कि यह लोग किस काबिल है इनकी यह तकलीफ इनके बयान मे साफ दिखाई दे रही है ।  संघ पर कई बार राजनीतिक कारणो से आफत आई पर वह हर बार अग्नि परीक्षा मे अपने को पाक साफ करने मे सफल रहा । वही उनके समर्पित संघ कार्यकर्ताओ ने जमीनी काम कर जो राजनीतिक परिवर्तन ही कर दिया यह इन्होने कभी सपने मे भी नही सोचा था ।  सोया हुआ हिंदू ही या अपने राजनीतिक मकसद के लिए जयचंद जैसे हिंदूओ को यह  लोग पसंद करते है । पर अगर राष्ट्रवादी विचार धारा का कोई बंदा है तो इन्हे यह बर्दाश्त नही है । इसलिए संघ और भाजपा इनके चश्मे मे नही बैठते । यही इनके परेशानी का मूल कारण है । पर यह  जो लौ जली है यह कम नही होनी चाहिए  । वही राममंदिर ट्रिपल तलाक काश्मीर के तीन सौ सत्तर धारा का खात्मा वही सीएए बिल का पास हो जाना इनके राजनीतिक विचारधारा पर जहां विराम था वही फिल्मो मे भी इनके सफलता के  व्यवसायिकता की गारंटी खत्म होने के कारण उसमे ताला लगना इनके बदहवासी का कारण है । देश अब जागृत हो गया है अब उसे यह भी पता चल गया है कि स्वाधीनता संग्राम मे किसका कितना रोल है । वही इतिहास के हमारे नायक कौन है अब लोग खुलकर बोलने लगे है ।  पहले एक समय था जब राष्ट्रवाद की बात करना सांप्रदायिक माना जाता था ।  अब लोगो ने विज्ञापन से लेकर फिल्म तक इनका बहिष्कार कर दिया यही इन लोगो के लिए सही जवाब था ।  यह भी सत्य यह बहिष्कार शायद आगे भी रहे ।  यह वह देश है जहा मिसाइल मैन  पूर्व राष्ट्रपति स्व. डा अब्दुल कलाम को सर आंखो पर रखा है उन्हे प्यार दिया ।  बस एक बार अपने अंदर झांकने की आवश्यकता है ।  शायद इनको इनके प्रश्नो के उत्तर मिल जाएंगे ।
बस इतना ही
डा.  चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ 

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