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विशेष लेख- हिंदुस्तान आजाद हो गया पर हिंदू आजाद नही हुआ, धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाया गया तो सब नागरिक समान क्यो नही


डा.वाघ की वाल मे आज मेरे कल के एक ट्विट पर चर्चा करूंगा । कल का मेरा ट्विट ”  हिंदुस्तान आजाद हो गया पर हिंदू आजाद नही हुआ ” । मै जानता था मैने धर्म निरपेक्ष के झंडाबरदारो के दुखती रग पर हाथ रख दिया है । चलो सविस्तार लिख ही दू हम कैसे आजाद नही हुए ? पहले तो जब यह देश आजाद हुआ तो यह कहा गया हम एक साथ नही रह सकते । फिर धर्म के आधार पर ही विभाजन हुआ और हिंदुस्तान मे ही हमने पाकिस्तान और उसमे बांग्लादेश भी बनते देख लिया । पर हम हिंदूओ के साथ इन धर्मनिरपेक्ष झंडाबरदार ने धोखा कर दिया और हमे धर्म निरपेक्ष राष्ट्र बनाकर झोंक दिया गया । जब 1947 का बटवारा हुआ था तो ज्यादा नही सिर्फ दस लाख हिंदूओ को निर्ममता से मारा गया । वही लाखो की संख्या मे पलायन भी हुआ। पर यहां अहिंसा का पालन करते हुए यहां कुछ भी नही हुआ। फिर इस देश मे हिंदुस्तान मे हिंदू अपने ही देश मे शरणार्थी बनकर रहने को मजबूर हो गए ।  फिर महात्मा गांधी जी की हत्या हुई तो उसके प्रतिक्रियास्वरूप अहिंसा आंदोलन के समर्थको ने मात्र दस हजार चितपावन ब्राम्हण को मार डाला । वही उनके जमीन जायदाद से बेदखल कर कब्जा कर लिया । एक तरफ पाकिस्तान मे हम हिंदूओ के धर्म स्थल जहां तोड दिए गए वही हमारे  सांस्कृतिक विरासत खत्म कर दिए गए । जो हिंदू थे तेइस प्रतिशत से घटकर सिर्फ दो प्रतिशत ही रह गए।  वो भी इतनी परेशानी मे थे की उनके लिए मोदी जी को सीएए लाने की नौबत आ गई पर हमारे झंडाबरदार ने इसका भी जमकर विरोध किया । दूसरी तरफ अपने ही देश मे  हिंदूओ के आराध्य कैद ही रह गए उनकी भी आजादी के लिए हमे न्यायालय के तरफ ही रूख करना पडा । अगर मोदी जी की सरकार नही आती उनके संकल्प पत्र मे राम  मंदिर का भी उल्लेख था तो आज हम राममंदिर बनते देख पा रहे है । जिन लोग कहते है आतंकवाद का धर्म नही होता फिर सन उन्नीस सौ चौरासी मे इंदिरा गांधी जी हत्या के बाद धर्म ढूंढ लिया था जैसे गांधी जी की हत्या के बाद ढूंढ लिया था उस समय भी सिक्ख भाइयो की हत्या हुई पर कोई दोषी नही था । अभी ले जाकर कुछ लोग-बाग को सजा हुई । काश्मीर मे तो  1991  काश्मीर फाइल्स मे तो लोगो ने देख ही लिया जो आज तक बदस्तूर जारी है । आतंकवाद का धर्म नही होता बस मारे जाने वाले का धर्म होता है । आजादी के पचहत्तर साल बाद भी हिंदुस्तान आजाद है पर हिंदू तो सुरक्षित नही है । अब दूसरे पहलूओ मे आया जाए जब धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाया गया तो सब नागरिक समान क्यो नही हुए ? फिर अल्पसंख्यक बनाकर विशेषाधिकार क्यो दिया गया ? फिर यहा हिंदूओ को ठगा गया । सभी दूसरे धर्मो को अपने धार्मिक रीति-रिवाज से चलने की आजादी थी पर वह आजादी बहुसंख्यक को नही थी । हमारे मंदिर पर टैक्स दूसरी तरफ दूसरे धर्म स्थल कर मुक्त थे । जहा पुजारियो को कोई तनख्वाह नही पर इमाम लोगो को तनख्वाह थी । मदरसे भी शासकीय पैसो से चल रहे है दूसरी तरफ गुरूकुल करीब करीब बंद है । हद तो तब हो गई आजाद भारत मे ही हमारे पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह यह कहते है की इस देश के संसाधन मे पहले अल्पसंख्यको का अधिकार है  । वही प्रदेश के एक सरकार व उनके मुख्यमंत्री धर्म देखकर चिकित्सक को कोविड मे मरने के बाद मुआवजा देते है । वही मौलाना मदनी जी बडी मीठी आवाज मे जब  यह कहते है जिनको हमारा रहना खाना पसंद नही है वह यहा से चले जाए ।  सही बात है पहले उनके पास चाइस था पचहर साल बाद यह हमारे पास आ गया है । शुक्रिया मदनी जी बस यही तो बचा था । जिस देश मे महात्मा गांधी पर कुछ कहने से राष्ट्रद्रोह लग जाता है । पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम के अस्तित्व पर ही प्रश्न न्यायालय मे लगाने की छूट है वही कुछ भी बोलने पर भी आजादी है । आजादी वह है जो जेएनयू  मे मांगी जा रही है । यह वह देश है अगर अपने ही देश मे अंबानी अडानी बाबा रामदेव हिंदू कमा ले तो मिर्ची लग जाती है पर विदेशी कंपनीज कमा ले तो मुंह मे दही जम जाता है वहां तो नेस्ले का कुछ मीठा हो जाए निकल जाता है । कितना लिखू यही विराम देता हू बस यह कटु सत्य है की हिंदुस्तान आजाद हुआ है पर भारत नही और हिंदू भी नही ।
बस इतना ही
डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ

(यह लेखक के निजी विचार हैं)





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