देश विदेश

विदेश यात्रा संस्मरण 14 – पहाडों के उपर की हरियाली फूल के साथ के प्राकृतिक झरने हमे सुखद अहसास करा रहे थे

विदेश यात्रा का संस्मरण 14  मै इस यूरोप यात्रा के संस्मरण के साथ हम उन मुद्दों पर भी बात करेंगे जो हमे यूरोप पश्चिमी देशों के मुकाबले  हमे पिछे करती दिखाती है ।  अभी मै सडकों पर ही बात कर रहा हू क्या कारण है कि वहां की सडकों का जाल इतना सुदृढ दिखाईं देता है पर अभी हमारे यहां यह दिखाई क्यो नही दिखाई देता यह भी विचारणीय अनुत्तरित प्रश्न है । वहां के नागरिक  राष्ट्रवादी होते है । यहां राष्ट्रवादी नागरिक का मतलब ही गाली होता है । वहां यह नहीं  देखते कि देश हमारे लिए क्या कर रहा है वहां यह देखते हैं कि हम देश के लिए क्या कर रहे है ।  अभी मैने समाचार पढा कि बिलासपुर मे रोड मे दस करोड़ खर्च होने के बाद भी रोड बरसात मे पुनः वैसे हो गये है ।  किसकी जवाबदेही किसी की नहीं ऐसे मे कितना भी संपन्न देश हो संसाधनों का उपयोग हो  ही नहीं सकता।  वहीं पश्चिमी देशों में एक बार कोई निर्माण कार्य हो गया फुर्सत।  यही कारण है कि हम सब कुछ होने के बाद भी बराबरी नहीं कर सकते । भ्रष्टाचार मे आकंत तक डूबे लोग वहां की बराबरी कैसे कर सकते है । हमारी गाडी इस बीच सुंदर वादियों मे चल रहे रही थी । फूलों से और घास से आच्छादित वादियों ने बिलकुल ही तबियत खुश कर दी । मेरे को इस बात का डर हर समय लगा रहता था कि यहां बहुत ठंडी होगी। पर जो तापमान था करीब करीब अपने ही देश जैसे था । उल्लेखनीय है कि मैने बीच मे एक बात चर्चा मे  थी कि एक चिकित्सक की भी वेदर के कारण उनकी तबियत बहुत खराब हो गई थी उसके कारण उन्हे अपनी यात्रा को बीच मे स्थगित कर वापस आना पडा था । पर यह बात मेरे भी जेहन मे थी और हम लोग भी पूरी तैयारी से ही गये हुए थे । पर दूर दूर तक ऐसा कुछ नहीं था । वहीं पहाडों के उपर की हरियाली फूल के साथ के प्राकृतिक झरने हमे सुखद अहसास करा रहे थे ।  पर सडकों मे न जानवर तक छोडो आदमी तक दूर दूर तक दिखाई नहीं दे रहे । इक्का दुक्का ही गाडी मिल रही थी ।  हम वेलिसेलन के कुछ पास भी आ रहे थे।  वादियों मे अब हमे बर्फ की चादरों से ओढ हुए दिख रहे थे ।  सफेद वादियां मन को मोह रही थी । पहले बार सफेद चादर से ढके पहाड़ दिखने से ऐसा लग रहा था कि यही मंजिल है । पर मंजिल कोसों दूर थी यह तो मात्र झांकिया ही थी ।  वहीं पहाडों के पश्चिम देशो के कलाकृति वाले मकानों को देखकर आश्चर्य महसूस हो रहा था कि जिन्हे हम फोटो मे चित्र मे देखते थे वह देखने को मिल रहा है  ।  मकानों मे जहां दूरियां वहीं सडकों से भी काफी दूर थी । कहा जाता है कि वहां के अधिकांश मकान लकडियो के बने हुए ज्यादा रहते है । जो वहां के वातावरण के अनुरूप रहते है । इस बीच इस देश की एक खासियत जिसका जिक्र अभी तक नहीं आया वह था यहां के टनल  (   बोगदा  )   यहां सडकों को पहाडों को ज्यादा काटकर बनाया गया।  अब इसके बारे मे आगे बताऊंगा  ।
बस इतना ही 
डा.  चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ

Related Articles

Back to top button