विदेश यात्रा का संस्मरण – फ्रांस एक बहुत बड़ा दुग्ध उत्पादक देश में है शामिल

विदेश यात्रा का संस्मरण दस – अब हम फ्रांस के अंदर के गांवों में दाखिल हो गये । बहुत अच्छे अच्छे छोटे मकानों को देखकर बहुत अच्छा लग रहा था । मकानों में दूरियां बहुत थी । रास्ते में कोई दिख नहीं रहा था । यहां तो यह हाल रहता है कि हम तो अपनी जमीन तो नहीं छोडते पर शासकीय जमीन मिलती है तो उसे भी नहीं छोडते । मकानों को देखकर बरबस ऐसा लगता था कि एक बार अंदर से भी वहां के गांवों के मकान देखने को मिल जाए । गांव मे भी हर वह चौराहे पर सिग्नल देखने को मिला वैसे उसकी आवश्यकता हमारे हिसाब से तो बिलकुल नहीं थी । हम लोग वहां रहे और खाली देखकर निकल भी जाएं। मैंने देखा है कि वहां के लोग नियमों का बहुत अच्छे से पालन करते है । वहीं कहीं कहीं तो इतनी सहजता विदेशी अतिथियों के लिए थी कि पहले हमे निकलने का मौका वो लोग स्वंय देते थे । हम लोगों को देखकर मुस्कान आनंद दायक होती थी । जैसे हम आगे बढे तो वहां के खेतों से परिचित हो रहे थे । मैने कहीं पढा था फ्रांस भी एक बहुतायात में दुग्ध देश उत्पादक है । जब मैंने वहां के चारागाह मे वहां के गाय की नस्ल देखा मजा आ गया। अभी तक हम अपने ही देश के गौ माता से परिचित थे । पर वहां की गाय जैसे हमने फोटो मे भी देखा है सफेद और बीच बीच में काले धब्बे वाली ज्यादा रहते है । वैसे दूसरे रंगों की भी गाय देखने को मिली है । एक विशेषता यह है कि गाय लंबी पर कम ऊंचाई की ज्यादा रहतीं है । विशेषकर गाय के थन के अनुसार देखकर तो ऐसा महसूस होता है कि वह कम से कम दस से पंद्रह लीटर से कम क्या दूध देती होगी । मैंने जैसे देखा कि वहां की गाये उन्मुक्त होकर हरा चारा चर रही थी । वहीं कहीं भी उनको देखने वाला दूर दूर तक नहीं दिख रहा था यह आश्चर्य जनक बात थी । वहीं हमारे कि मवेशियों को चारा न मिलने के कारण ही यह मवेशिया पालीथीन खाने को बाध्य होती है । जहां उनके बीमार होने की संभावना बहुत हो जाती है। कभी भी रास्ते पर हमे मवेशियों से सामना ही नहीं हुआ । यह देखभाल और उनके रख रखाव के तरीके को अपनाने की आवश्यकता है। जिससे गोधन भी सुरक्षित रहेगा वहीं हमे उनके जैसे दूध भी बहुत मात्रा मे मिलेगी। जिससे वहां के कृषकों जैसे यहां के कृषकों मे भी संपन्नता आएगी। यह रोजगार मे लोग आकर्षित होंगे तो बेरोजगारी भी कम होगी । जो इस मामले मे जो अंतर मुझे महसूस हुआ मैंने आप लोगों के लिए शब्दो मे उकेर दिया । क्रमशः
बस इतना ही
डा . चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ




