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विदेश यात्रा संस्मरण – फ्रांस में लोग नियमों का पालन करने का जज्बा गजब का है

विदेश यात्रा का संस्मरण तेरह 13  अब हम लोग सबेरे से अच्छा नाश्ता कर स्विट्जरलैंड का सबसे प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल जिसको आम लोग वहां के फोटो मे अपने यहां के  फिल्म मे भी देखते है वह रमणीय स्थल है जूंगफ्राऊजाॅक उसके लिए हमे पहले इंटर लाॅकन जाना था ।  पर जब हम सडकों पर निकले तो इतनी चौडी सडकों और पूरी तरह से साफ सुथरा सडके देख कर अपने यहां की एक राजनेता की याद आ गई।  शायद यही की सडकों को देखकर आज से तीस साल पहले उक्त राजनेता ने कहां था कि एक अभिनेत्री के गाल के समान मुलायम सडकों का जाल मै पूरे अपने प्रदेश में बिछा दूंगा।  बस इनकी कल्पना तो यही तो साकार होते दिख रही थी ।

सडकों के दोनो तरफ आकर्षित करते हुए मकान निगाहे हटाने का ही मन नहीं कर रहा था । एक से एक मकान जो बरबस ही ध्यान को खींच रहे थे । वहीं मकानों में खासियत थी कि सब लोगों के मकानों मे फूलों से गमलो से सजाया गया था।  यह जरूर है कि यहां का मौसम वातावरण ही इन फूलों के लिए अनुकूल है तभी यह जन्नत बन रहा है।  हर मकानों में अलग-अलग प्रकार के फूल उन मकानों में चांद लगा रहे थे । वहीं सडकों मे भी कोई कचरा नहीं दिख रहा था ।

इसकी कल्पना करना ही मुश्किल है हमारे यहां तो जहां सडकों पर जानवरों की आवाजाही आम है वही पॉलीथिन और कचरा उन सडकों के गहने  है जो हर समय हमारे साथ रहते है  । फिर सडकों पर अवैध कब्जे तो यहां का हिस्सा ही बन गये है । देखा जाए तो यहां गाडी चलाना काफी आसान है ।  न रोड मे भीड़ भाड़  न आवाजाही  जिसने भी अपने यहां के शहरों में चला लिया उसके लिए यहां  काफी आसान है  । बस राइट लेफ्ट को लेकर ही थोडी झंझट है । वहीं गाडियो मे भी अत्याधुनिक करण भी एक समस्या बन सकती है । लोग अपने नियमों का जहां पालन करते हैं वहीं विदेशी अतिथियों को देखकर रूक कर पहले जाने के लिए अपने फर्ज को निभाते है ।  यह मैने फ्रांस मे भी देखा । 

  हमारे यहां देश भक्ति कूट कूट कर भरी हुई है इसलिए हम लोग राष्ट्रीय संपत्ति को अपनी संपत्ति समझते है।  जिसके कारण रोड की चौड़ाई अपने आप कम हो जाती है । पुनः विषय पर आऊं हमे इंटर लाॅकन जाने के लिए करीब सौ किलोमीटर की दूरी तय करनी थी ।  कुछ समय बाद आबादी कम इसलिए मकानों के बीच मे खांसी दूरियां बनी हुई थी ।  प्राकृतिक सौंदर्य चाह कर भी हम कैद पूरी तरह से न कैमरे मे न मोबाइल मे न स्मृतियों में कैद कर पा रहे थे । हालात ऐसे थे कि किसको पकडे और किसको छोडे तय करना मुश्किल हो रहा था।  कुल मिलाकर यह लग रहा था सफर खत्म न हो । बस इतना ही  क्रमशः डा.  चंद्रकांत  रामचन्द्र वाघ

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