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सीएम ने किया शिक्षकों से ऐसा सवाल, की जवाब सुन खुद हो गए शर्म से लाल

जयपुर मुख्यमंत्री के सामने ही शिक्षकों ने शिक्षा विभाग और शिक्षा मंत्री की ऐसी पोल खोल खोली की पूरी सरकार शर्म से पानी-पानी हो गयी। शिक्षक सम्मान में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से सवाल तो वाहवाही लूटने के लिए पूछा था कि, क्या मेरी सरकार में ट्रांसफर के पैसे देने पड़ते हैं ? जवाब में शिक्षकों ने जवाब दिया, हां पैसे देने पड़ते हैं। ये सुनते ही मुख्यमंत्री और मंच पर बैठे शिक्षा मंत्री शर्म से लाल हो गये। ये वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है। यह वीडियो एक समारोह का है जिसमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शिक्षकों को संबोधित कर रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने शिक्षकों से पूछा कि क्या उन्हें तबादलों के बदले पैसे खिलाने यानी रिश्वत देनी पड़ती है? तो इसी दौरान शिक्षकों ने एक सूर में कहा ‘हां’।

शिक्षकों ने पैसे देने की बात कही तो, तो मुख्यमंत्री बिल्कुल झेंप से गये। कुछ पल के लिए तो मुख्यमंत्री एकदम चुप हो गये और फिर शिक्षामंत्री की तरफ तिरछी नजरों से देखकर कहा, कि अगर शिक्षकों को ट्रासफर के लिए पैसे देने पड़ते हैं, तो बहुत ही शर्म की बात है। उन्होंने कहा कि एक सिस्टम बनायेंगे, ताकि इस तरह पैसे का लेनदेन खत्म हो। राजस्थान की राजधानी जयपुर के बिड़ला सभागार में सीएम राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान अशोक गहलोत ये बता रहे थे कि ट्रांसफर और पोस्टिंग में किस तरह से उनकी सरकार ने पारदर्शिता बरती है. अशोक गहलोत ने अपने संबोधन में कहा कि हमारी सरकार के समय ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए पैसे नहीं लगते. उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों से संवाद स्थापित करते हुए कहा कि बताइए, हमारी सरकार के समय ट्रांसफर-पोस्टिंग में पैसे लगते हैं क्या?

सीएम गहलोत का इतना कहना था कि पूरे हॉल में ‘हां’ गूंज उठा. शिक्षकों का जवाब सुनकर सीएम गहलोत भी असहज हो गए. उन्होंने कहा कि कमाल की बात है, पैसे लगते हैं? शिक्षकों का जवाब फिर से एक स्वर में हां था. शिक्षकों का जवाब सुनकर शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा भी झेंप गए. सीएम गहलोत ने इसके बाद कहा कि हमारे यहां करप्शन नहीं है.उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि अगर आपसे कोई चाय-पानी के लिए भी पैसे मांगता है तो हमें आकर बताओ. सीएम गहलोत ने हालात को संभालने की कोशिश करते हुए कहा कि ये पहले की बात होगी, हमारे समय की नहीं. हमने सुना है कि अब तो विधायक आकर कहते हैं कि हमारे टीचर का काम कर दो और काम हो जाता है.

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