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आलेख – इस तरह के राजनीति का ज्यादा भविष्य नही – डॉ. वाघ की वाल से – cgtop36.com


डा. वाघ की वाल से आज अपनी बात पर मै तो पहले इन धर्मनिरपेक्ष दलो का शुक्रिया अदा कर दू की इन लोगो ने अपने बडे बडे वोट बैंक के ऐजेंडे पर चलकर सोये हुए हिंदूओ को थोडा सा जगाया है । जो काम संघ मेहनत कर नही कर सका विश्व हिंदू परिषद इतने दिनो की सक्रियता के बाद भी हर समय हताश रहा वह काम इन धर्मनिरपेक्ष दलो ने कर दिखाया  । वैसे यह अपने ऐजेंडे पर तो सात दशक से चल रहे है  पर कुछ समय की इनकी गतिविधियो के कारण दल के ही नेताओ ने ही दल से त्यागपत्र देने मे ही अपनी भलाई समझी । किसी के वोट के लिए यह लोग इतने ज्यादा संवेदनशील व उत्तेजित हो जाऐंगे किसी ने कल्पना तक नही की थी । जो देश धर्म के आधार पर बटा हुआ है वहां भी महिलाओ को स्वतंत्रता है । पर दुर्भाग्य है हमारे देश मे ही राजनीतिक कारणो से यह लोग उनसे भी ज्यादा धार्मिक दिखना चाहते है । खैर जो होता है अच्छे के लिए होता है । सबके चेहरे से नकाब हटते जा रहा है । जिन लोग अपने राजनीतिक वजूद के लिए इस ऐजेंडे मे काम कर रहे है वह सब लोग धीरे धीरे से बेनकाब होते जा रहे है । आज का युवा पार्टी लाइन से नही विचारो से चलता है । उसे अपने भले बुरे का भेद मालूम है । दूसरे शब्दो मे कहा जाए तो आज समाज पुरातन वादी और आधुनिकता के सोच मे बदल गया है । मुझे कहने मे कही भी संकोच नही की किसी भी जनसंघ के नेता ने या भाजपा नेताओ ने सपने मे भी नही सोचा होगा उस सोच को कोई नही देश के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधीश स्व. मोहम्मद करीम छागला पहले शख्स थे जिन्होने इस विचार धारा के लोगो की सत्ता पर आऐंगे यह भविष्य वाणी भाजपा के निर्माण के दिन  ही उन्होने कर डाला था ।   आज भाजपा के कार्यकर्ताओ के मेहनत के साथ इन धर्मनिरपेक्ष दल व नेताओ का उससे बडा ही अप्रत्यक्ष योगदान है जहां भाजपा विश्व की सबसे बडी पार्टी है वही आज देश मे राज कर रहे है । इन्होने ही धर्मनिरपेक्षता के तुष्टिकरण के नाम से सोये हुए हिंदूओ को जगाया है मै तो यहां तक कह सकता हू इन्होने उनके धर्म के लिए सचेत कर उन्हे सांप्रदायिक तक बनाया । इतिहास मे हिंदू इतना कभी जागृत नही था जितना आज  दिखाई दे रहा है । यह इन लोगो की बरसों-बरस के धर्मनिरपेक्षता का ही प्रमाण है । यह जितना प्रमाण मांगेंगे जितना मंदिर जाऐंगे जितना हिंदू और हिंदुत्व की परिभाषा बताऐंगे जितना इनके सपने मे भगवान आऐंगे और यह जितना सम्मेलन करेंगे जितना मंदिर बनाने का संकल्प करेंगे उतना ही हिंदू भी अब अपने साथ धर्म के लिए सोचेगा । इस बहुसंख्यक धर्म के लोग अब यह जरूर सोचने लगे है कौन इनका हिमायती है । कौन है जो अस्सी प्रतिशत लोगो का ध्यान रखेगा । यही कारण है की अब लोगो ने जो हर समय दिखाते थे उससे बचना चाहते है । वही किसी भी धर्म के लोग हो उन्हे पता है की कौन उनका उपयोग कर रहा है । आजकल सभी धर्मो मे आधुनिक विचार वालो को महत्व दिया गया है । लोग जमाने के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहते है । इसलिए आज बहस मे यह खुलकर कह रहे है । पर यह जरूर है विपक्ष अब गढ्ढे खोदने की जगह रचनात्मक कामो का विरोध करे । पर ढर्रे से चलकर यह विपक्ष और उसके नेता अपनी साख खो रहे है । यही कारण है की इस्तीफे का सैलाब आया हुआ है । इन नेताओ को भी लगने लग गया है की हमे अब जनभावनाओ के साथ रहना चाहिए।  इस तरह के राजनीति का ज्यादा भविष्य नही है । हमारे संविधान ने सभी के लिए बराबरी की बात कही है । पर दुर्भाग्य है जब धर्म के आधार पर देश बटा तो वहां भी यह नही है पर हमारा विपक्ष जरूरत से ज्यादा ही धर्मनिरपेक्ष है । बस जो कर रहे है वह लोगो को दिखाई दे रहा है । बस आप लोग ऐसा ही कर लोगो को जागृत कर रहे है उसके लिए आभार  ।
बस इतना ही
डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ 



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