हिडनबर्ग के खबर से आर्थिक साम्राज्य मे जो उथल-पुथल मची, आज करते हैं इस पर बात – डॉ वाघ

चलो आज डा.वाघ की वाल पर हिडनबर्ग के खबर से आर्थिक साम्राज्य मे जो उथल-पुथल मची है इस पर बात करेंगे । वैसे भी विपक्ष यह हर समय प्रचार-प्रसार करते रहा है की अडानी नंबर वन मोदी जी के क्षत्रछाया मे ही हुआ है । पर अडानी ने प्रत्येक दल के सरकार के साथ काम किया है जिसका उदाहरण राजस्थान व पश्चिम बंगाल की सरकार है जो मोदी जी विरोधी है फिर इन लोग-बाग ने क्यो मोदी जी के दोस्त के साथ काम किया इसका कोई उत्तर नही है । जब से मोदी जी प्रधानमंत्री बने है विपक्ष ने ऐसा कोई भी मुद्दा है जो छोडा नही है । हालात यह है की इन लोग-बाग ने लोकतंत्र मे आंदोलन की दिये हुए अधिकारो का बेजा दुरूपयोग किया । इन्होने सडको को ही बंधक बनाकर यातायात मे खुले आम बाधा डाली । बंधुओ ने तो छब्बीस जनवरी तक को नही छोडा । खैर जनता की अदालत ने इनका काम कर दिया । मोदी जी के खिलाफ हर मोर्चे पर धराशाई होने के बाद अब यह लोग आर्थिक मोर्च पर आ गए है । यह वह लोग है जो न्यूयार्क टाइम्स पर इस देश की मीडिया पर ज्यादा भरोसा करते है । यह वह लोग है जो चीन के राजनीतिक पार्टी के मुखपत्र जो हर समय भारत विरोधी समाचार देता है उस पर ही हमारे सियासत दानो को ज्यादा भरोसा है । यही हाल बीबीसी का है । चलो विषय पर ही आया जाए कोई भी व्यवसायिक घराने नंबर वन टू शेयर मार्केट पर ही निर्भर रहते है । इस रिपोर्ट से निश्चित ही शेयर बाजार पर असर पडना स्वाभाविक था । इस रिपोर्ट का असर यह हुआ की अडानी जैसे खबरे आ रही है वह बीस पायदान नीचे उतर गया । अब निवेशको मे विश्वास पैदा करने की आवश्यकता का काम अडानी जी को करना होगा । खैर अगर इस अग्नि परीक्षा से यह ग्रूप विश्वास पैदा कर लेता है तो भविष्य मे जो नुकसान हुआ है क्या इसकी भरपाई वह रिपोर्ट या वह राजनीतिक दल व नेता करेंगे जिन्होने यह अस्थिरता का माहौल पैदा किया । दुर्भाग्य यह है की कोई राजनीतिक जवाबदेही नही है । जिस दिन जवाबदेही तय होने लगेगी तो कोई भी मिथ्या आरोप लगाने के पहले दस बार सोचना पड़ेगा । यह ही संभ्रांत नेता है जिन्होने माननीय गडकरी जी स्व. अरूण जेटली व माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी से उच्चतम न्यायालय मे माफी मांगी थी । पर जो छबी खराब हुई उसका क्या ? देखो जो नुकसान होना है वह तो हो गया पर अडानी समूह इससे बाहर कैसे निकलता है यह देखने वाली बात होगी । जिन विपक्ष को यह मालूम था की यह समूह पेपर पर ही है उन्होने उनके साथ व्यवसाय कर जनता के साथ धोखा किया है । उल्लेखनीय है की कोई भी उधोगपति किसी भी नेता व दल का विरोध नही करता उसे अपने धंधे पानी से मतलब रहता है । यह ही लोग है जो हर पार्टी को उसके हैसियत के हिसाब से चंदा देते है जो समाचार भी बनता है । इन दलो के पास कहा से पैसा आता है । उम्मीद है यह ग्रूप इस राजनीतिक साजिश का या तो सार्थक जवाब देकर सबके मुंह बंद कर देगा या उसका पेपर मे खडा किया गया यह आर्थिक महल धराशाई होता है यह देखने वाली बात होगी । पर यह तय है अडानी जी के भविष्य के साथ-साथ इस देश के आर्थिक नीतियो का भी भविष्य तय है ।
बस इतना ही
डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ


