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क्या आपकी EMI घटेगी फैसला लेगा RBI, बैठक में होगा फैसला, जानें बढ़गी महगाई या क्या होगा फैसला

लोगों के मन में सवाल है कि क्या RBI ब्याज दरों में कोई परिवर्तन करेगा या दरें स्थिर रहेंगी. कोरोना के चलते अर्थव्यवस्था और बाजार के जो हालात हैं, उसे देखते हुए ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम दिख रही है. अगर ब्याज दर घटाया जाए तो इससे महंगाई बढ़ने की संभावना है. अभी खाद्य तेलों और दालों में जिस तरह की तेजी देखी जा रही है, उसके मद्देनजर ब्याज दरों में गिरावट की उम्मीद कम है. RBI की बैठक चल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 की दूसरी लहर और महंगाई बढ़ने की आशंकाओं के बीच भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की मॉनेटरी पॉलिसी की शुक्रवार को घोषित की जाने वली ब्याज दर को पहले के स्तर पर ही बनाए रख सकता है. इस साल अप्रैल में हुई पिछली बैठक में रेपो रेट को 4 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट को 3.35 प्रतिशत ही बनाए रखा गया था. पीडब्ल्यूसी इंडिया लीडर (आर्थिक सलाहकार सेवाएं) के रानन बनर्जी ने कहा कि पेट्रोल की बढ़ी कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने का जोखिम है. इससे रिजर्व बैंक के लिए ब्याज घटाने का निर्णय करना आसान नहीं होगा. अगर ब्याज नहीं घटेगा तो आपकी ईएमआई भी नहीं घटेगी.

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर एम गोविंदा राव का कहना है, रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी को जीडीपी के नंबर का अनुमान कुछ राहत दे गया है. हालांकि देश के कई राज्यों में चल रहे लॉकडाउन और कर्फ्यू के चलते बाजार बंद हैं और अर्थव्यवस्था को झटका लगा है. इसे देखते हुए ऐसी संभावना है कि रिजर्व बैंक पूर्व के ब्याज दर को बनाए रखे और उसमें कोई कटौती न करे. कुछ चीजों की कीमतों में बड़ा उछाल देखा जा रहा है जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है. इससे बचने के लिए आरबीआई की समिति सावधानी से कदम उठाएगी और रेपो रेट को 4 परसेंट पर बनाए रखा जा सकता है.

हाउसिंग डॉट कॉम के ग्रुप सीईओ ध्रुव अग्रवाल भी ऐसा ही मानते हैं. उनका कहना है कि RBI के सामने अभी महंगाई को काबू में रखना प्राथमिकता है. हालिया लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था का जो नुकसान हुआ है, उसमें सुधार करना प्रमुख लक्ष्य है. रिजर्व बैंक नेशनल हाउसिंग बैंक में भी पैसा बनाए रखना चाहता है ताकि हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के कामकाज में स्थिरता लाई जा सके. इससे रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी आएगी. रिजर्व बैंक इसके लिए कुछ खास ऐलान कर सकता है.

अभी हाल में जारी आरबीआई की सालाना रिपोर्ट में कहा गया था कि मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान पूरी तरह से अर्थव्यवस्था की हालिया स्थिति को देखते हुए किया जाएगा. महंगाई को काबू में रखते हुए आर्थिक वृद्धि दर को बनाए रखने पर जोर होगा. सरकार ने अगले 4 साल के लिए महंगाई दर को 4 परसेंट न्यूनतम और 6 परसेंट अधिकतम पर रोक कर रखने का ऐलान किया है. 4 परसेंट की महंगाई ज्यादा से ज्यादा 2 परसेंट की बढ़ोतरी के साथ 6 परसेंट पर रोक कर रखने की तैयारी है.

वहीं अप्रैल महीन में रिटेल महंगाई की दर 4.29 परसेंट तक गिर गई थी जो कि पिछले तीन महीने का सबसे निचला स्तर था. सब्जियों और अनाजों के दाम नियंत्रण में रहने से महंगाई पर काबू पाया जा सका. कंज्यूमर प्राइस इंडेस्क के आधार पर ही रिटेल महंगाई की गणना की जाती है. रिजर्व बैंक इसी इंडेक्स के आधार पर अपनी मॉनेटरी पॉलिसी को तैयार करती है.

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