डॉ. कालड़ा ने शैलजा को दी नई जिंदगी, परिजनो ने किया डॉक्टर का धन्यवाद, कहा दी नई जिंदगी – cgtop36.com

रायपुर। पचपेड़ी नाका, कलर्स माल के आगे स्थित कालड़ा बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी सेंटर (छ.ग. शासन व छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल से मान्यता प्राप्त व एनएबीएच सर्टिफाइड) के संचालक व अंचल के प्रसिध्द कॉस्मेटिक व रिकन्स्ट्रेटीव सर्जन डॉ. सुनील कालड़ा ने बताया कि 18 अटूबर 2023 को 38 वर्षीय शैलजा (शहडोल निवासी) के कपड़ों में घरेलू कार्य करते हुए आग लग गई। जैसे ही शरीर में आग लगी तो उसे पास के अस्पताल लाए इसके बाद में बिलासपुर में प्राइमरी ईलाज किया गया।
बावजूद इसके मरीज में कोई सुधार नहीं दिखा और मरीज की हालत और खराब होती चली गई, मरीज की तबीयत खराब होता देख परिजन मरीज को कालड़ा प्लास्टिक कॉस्मेटिक सर्जरी एवं बर्न सेंटर, रायपुर लाया गया एवं गहन ईलाज में रखकर ईलाज किया गया।
बता दें कि डॉ कालड़ा की देखरेख में शैलजा का करीब 2-3 माह तक ईलाज चला उसके बाद स्वस्थ होकर सकुशल आज वह अपने घर जा रही है। डॉक्टर कालड़ा ने उसका बेहतर ईलाज कर उसे नई जिंदगी दी।
गौरतलब है कि शैलजा लगभग 55 से 60 प्रतिशत तक जल गई थी और बहुत ही गहरा जलन शरीर पर हो गया था, बचने की उम्मीद कम हो गई थी।
हॉस्पिटल में आईसीयू में रखकर रोज उनकी ड्रेसिंग की गई, बावजूद इसके उनका ब्लड व प्लेटलेट नहीं बन रही थी तो लगभग 30-40 बॉटल प्लेटलेट की व्यवस्लथा कर उन्हें लगाई गई। 2 बार स्कीन बैंक से स्कीन लगाई गई। शैलजा का ईलाज डॉ. सुनील कालड़ा, डॉ. सुंदरानी, डॉ. दास, डॉ. गोयल, डॉ. कुलकर्णी, गुलाब, बलराम एवं समस्त नर्सिंग स्टॉफ की देखरेख में हुआ।

उक्त जानकारी देते हुए उन्होंने आगे बताया कि वे विगत 33 वर्षों से कालड़ा बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी सेंटर में जले हुए मरीजों का ईलाज हो रहा है। यह सेंटर प्रदेश का एकमात्र सर्वसुविधायुत अस्पताल है जहां बर्न मरीजों की बहुत ही अच्छी तरह से केयर की जाती है। जिससे 90 प्रतिशत जले मरीजों को भी ठीक किया गया है।
उन्होंने आगे बताया कि जलने के बाद यदि मरीजों का सही तरह से ईलाज नहीं होता है तो जिससे जान को खतरा बन जाता है व बाद में स्कीन मोटी हो जाती है जिससे शरीर में खुजली होने लगती है व शरीर के हिस्से जैसे हाथ, पैर या गर्दन की स्कीन चिपक जाती है। जिससे मरीज सामान्य जीवन नहीं जी पाता। इन सभी विकृतियों का भी ईलाज भी हमारे अस्पताल में किया जाता है।

उन्होने कहा कि हमारे यहां एक्सक्लूसिव स्कीन बैंक भी है जिसकी स्कीन इस मरीज को लगाई गई है जोकि संपूर्ण भारत में बहुत ही कम जगहों पर उपलध है। स्कीन बैंक में मृत्यु उपरांत मरीजों की स्कीन को 6 घंटे के भीतर सुरक्षित निकाला जाता है अऔर उसे 5 साल तक स्टोर कर सुरक्षित स्कीन बैंक में रखा जाता है। गंभीर व जले हुए मरीजों को स्कीन की जरूरत पड़ने पर मरीज के शरीर में लगाया जा सकता है।
स्कीन बैंक में कोई भी जीवित या मृत अपनी इच्छानुसार अपनी स्कीन दान कर सकता है। उन्होंने आगे बताया कि हमारे यहां बर्न सेंटर में निम्न सुविधाएं उपलध है। 10 इंटेंसिव आइसोलेशन केयर ग्लास केबिन, हेपा फिल्टर/लेमिनर फ्लो 100 प्रतिशत जीवाणु रहित ग्लास केबिन, मल्टीपैरा मॉनीटर्स, वेंटिलेटर, सेंट्रल ऑसीजन सप्लाई, सेंट्रल सशन, जले हुए मरीजों हेतु विशेष बिस्तर, प्रति बिस्तर के लिए समर्पित स्टॉफ शॉवर ट्राली (जर्मनी से आयातित), संपूर्ण भारत का प्रथम एस्लूजिव बर्न यूनिट, जलने के बाद की विकृतियों का संपूर्ण ईलाज, डायलिसीस की सुविधा, संपूर्ण ओटी व आईसीयू लेमिनर एयर फ्लो सभी उपलब्ध है।
डॉ. कालडा ने बताया कि उनका अस्पताल एकमात्र ऐसा अस्पताल है जहां बर्न एवं लेजर सिस्टम की सुविधा है साथ ही स्पेशल ड्रेसिंग की सुविधा भी है जिससे घाव जल्दी भरता है इसके अलावा सिट ग्राफ्टिंग सुविधा अत्याधुनिक आईसीयू, ट्रामा सेंटर व बर्न यूनिट भी है, जिसमें दुर्घटना में घायल मरीजों का ईलाज अत्याधुनिक तकनीक व्दारा किया जा रहा है व 90 प्रतिशत तक जले मरीजों को भी बचाया जा सका है। हमारे यहां अत्याधुनिक बर्न युनिट है



