विटामिन D की जान ले जरुरी बातें, वरना हो सकता है सेहत को नुकसान

विटामिन डी (Vitamin D) हमारी सेहत के लिए बेहद ज़रूरी है. यह बात हम सभी जानते हैं कि विटामिन डी का मुख्य स्त्रोत सूर्य है. बीते कुछ सालों में दुनियाभर के लोगों में विटामिन डी की कमी देखी गई है. विटामिन डी की शरीर में कमी होने पर दिल संबंधी बीमारियों सहित कई गंभीर रोगों के होने का खतरा रहता है. यही वजह है कि कई लोग विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं. कुछ लोग ऐसा डॉक्टरी सलाह पर करते हैं तो वहीं कुछ लोग बिना किसी सलाह के ही सप्लीमेंट्स लेना शुरू कर देते हैं.
जरूरत से ज्यादा कोई भी चीज़ शरीर के लिए नुकसानदायक होती है. विटामिन डी सप्लीमेंट्स के साथ भी कुछ ऐसा ही है. अगर शरीर में सप्लीमेंट्स के जरिये ज्यादा मात्रा में विटामिन डी पहुंचता है तो यह शरीर को काफी नुकसान पहुंचा सकता है.
ज्यादा विटामिन डी से शरीर को ये हैं नुकसान
- किडनी (Kidney) – शरीर में ज्यादा मात्रा में विटामिन डी पहुंचने की सूरत में ब्लड में कैल्शियम का लेवल बढ़ जाता है. इसके चलते हमारे शरीर के टीश्यूज़, यहां तक की ऑर्गन्स को भी नुकसान पहंच सकता है. इसके चलते किडनी के डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है. कई बार तो विटामिन डी की अधिकता से किडनी हमेशा के लिए डैमेज हो सकती है जो कि़डनी फेल्युअर की वजह बनती है.
- हड़्डियां (Bones) – विटामिन डी ज्यादा होने की वजह से ब्लड में कैल्शियम बढ़ता है, इसकी वजह से हड्डियों को मजबूत करने वाला हार्मोन रूक जाता है. इससे हड्डियों से जुड़ी गंभीर समस्या पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है. लोगों में जोड़ों के दर्द सहित हिलने डुलने पर ही परेशानी होने लगती है.
- फेफड़े (Lungs) – शरीर में ज्यादा मात्रा में विटामिन डी पहुंचने पर ये कैल्शियम और फोस्फेट के क्रिस्टल को बनाता है जो ब्लड में जमा होने लगते हैं. ये क्रिस्टल्स फेफड़ों में इकट्ठा होकर उसे डैमेज करने लगते हैं. इसके लक्षण सीने में दर्द होना, कफ और सांस लेने में परेशानी होना होता है.
- गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल प्रॉब्लम (Gastrointestinal Problems) – विटामिन डी का शरीर में ज्यादा मात्रा में पहुंचना हमारी पेट की आंतों के लिए भी नुकसानदायक होता है. कैल्शियम बढ़ने से डायरिया, पेटदर्द और कब्ज की शिकायत होने लगती है. इसके चलते नकसीर और वोमेटिंग भी होती है.
- मेंटल हेल्थ (Mental Health) – विटामिन डी का शरीर में ज्यादा मात्रा में पहुंचना सिर्फ शारीरिक तौर पर ही नुकसान नहीं पहुंचाता है बल्कि इसके चलते मानसिक समस्याएं पैदा होने का खतरा भी बढ़ जाता है. इस वजह से डिप्रेशन, साइकोसिस और मतिभ्रम जैसी समस्याओं का भी लोग सामना करते हैं.




