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नक्सल आपरेशन के दौरान शहीद हुए श्रवण कश्यप के सम्मान में गांव में लगाई गई मूर्ती


बस्तर। साल 2021 के अप्रैल महीने में एक नक्सल आपरेशन के दौरान शहीद हुए श्रवण कश्यप के सम्मान में गांव में लगाई गई मूर्ती। जिसके बाद गांव की महिलाओ द्वारा मूर्ती की पूजा की गई। बनियागांव के इस बहादुर जवान की बलिदानी बस्तर के लोगों में जोश भरने का काम करती है। इस गांव के लोगों को श्रवण कश्यप पर गर्व है। यही वजह है कि यहां लोग श्रवण कश्यप की प्रतिमा की पूजा करते हैं।

छत्तीसगढ़ के बस्तर के बनियागांव के लोगों ने देश के वीर सपूत श्रवण कश्यप की मूर्ति की पूजा की है। जिन्होंने भारत मां की सेवा करते हुए नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दिया था। साल 2021 के अप्रैल महीने में श्रवण कश्यप एक नक्सल आपरेशन के दौरान बलिदान हो गए। वे एसटीएफ में प्रधान आरक्षक के पद पर सेवाएं दे रहे थे। उन्हें इसी महीने मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।

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दिल्ली में 9 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्रवण कश्यप की पत्नी को कीर्ति चक्र देकर सम्मानित किया। बस्तर अंचल के युवा उनके बलिदान से देश सेवा की प्रेरणा ले रहे हैं। बनियागांव के बाहर ही प्राथमिक स्कूल है, जहां से श्रवण ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई पूरी की। इस स्कूल के शिक्षक हतिमराम बागरे ने श्रवण के बारे में कहा कि वे बचपन में भी काफी अनुशासन प्रिय थे। बनियागांव स्कूल के लिए गर्व की बात है कि उनके श्रवण ने देश के लिए बलिदान दिया।

सोमवार को श्रवण कश्यप की पत्नी दुतिका कश्यप और कई लोग पूजा में शामिल हुए और नमन किया। बचपन से देश सेवा का सपना देखने वाले मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित बलिदानी श्रवण कश्यप बचपन से ही अनुशासन प्रिय थे। उनके शिक्षक आज भी उन्हें एक अच्छे छात्र के रूप में याद करते हैं। जगदलपुर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर बनियागांव उनका पैतृक गांव है। जहां बलिदान होने के सम्मान में उनकी मूर्ति लगाई गई है।

इस बारे में बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने श्रवण कश्यप की शहादत पर गर्व जताते हुए बताया कि बस्तर के इस वीर जवान पर देश को नाज है, जिन्होंने नक्सलियों से लड़ाई लड़ते हुए देश की खातिर सर्वोच्च बलिदान दिया। श्रवण कश्यप की बहादुरी बस्तर के लिए मिसाल बन गई है। आने वाली पीढ़ी इस वीर जवान की जीवनी से प्रेरणा लेंगे।



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