
खजाना शब्द का नाम सुनते ही लोगों के मन में पैसा, सोने के सिक्कों, हीरे-जवारत की तस्वीरें उभरने लगती है. कई बार तो लोगों को ऐसा लगता है कि यार अगर सच में खजाना मिल जाए, तो जीवन बदल जाए।
पर असल लाइफ खजाना बस एक ख्याली पुलाव लगता है क्योंकि दुनिया में कई खजाने ऐसे हैं जिन्हें आज तक कोई ढूंढ ही नहीं पाया है. इसके अलावा खजाने की चाह में कई लोगों की जान तक चली गई है।
चार्ल्स आइलैंड: अमेरिका के पास एक द्वीप स्थित चार्ल्स आइलैंड के खजाने को भी श्रापित माना जाता है. माना जाता है कि 1721 में मल्लाहों द्वारा मैक्सिको के सम्राट गुआजमोजिन की सारी संपत्ति चोरी कर यहीं छिपा दी थी. 1850 के दौरान कुछ लोगों ने खजाना चोरी करने का प्रयास किया, पर सभी मारे गए।
एल डोराडो : ये खजाना भी उन खजानों में से है जिसकी वजह से अब तक कई जानें जा चुकी हैं. ऐसा कहा जाता है कि एल डोराडो का खजाना कोलंबिया की गुआतावीटा झील में दबा हुआ है, जिसमें सोना ही सोना है. माना जाता है कि इस जगह पर चिब्बा आदिवासियों का निवास हुआ करता था।
द अंबेर रूम: दुनिया का 8वां अजूबा माना जाता है. कहा जाता है कि पर्शिया और रूस के बीच हुई संधि में अंबेर रूम रूस को गिफ्ट के तौर पर मिला था. ये कमरा पूरी तरह से सोने से बना हुआ, जिसके अंदर हर एक चीज सोने की है।
इंका सभ्यता : कहते हैं कि ये खजाना ज्वालामुखी की तलहटी में छिपा हुआ है. इंका सभ्यता के लोगों ने फ़्रांसिस्को पिज़ारो से बचाने के लिए खजाने को तलहटी में डाला था. कहते हैं अब तक जिसने भी खजाने के लिये प्रयास किया है, वो अपनी जान से हाथ धो बैठा है।
ग्रॉसवेनर का खजाना – ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का सबसे बड़ा जहाज था ग्रॉसवेनर। यह जहाज मद्रास से बेशकीमती हीरे, 2,600,000 सोने के सिक्के, मूर्तियां, बेशकीमती पन्ना, माणिक और अन्य रत्नों को लेकर 4 अगस्त 1782 को इंग्लैंड के लिए रवाना हुआ था। लेकिन दक्षिण अफ्रीका स्थित केपटाउन के पास यह समुद्र्र में डूब गया। बाद में इस जहाज के मलबे और खजाने का कुछ भाग तो मिला, लेकिन आज तक पूरे खजाने की खोज अबूझ पहेली बनी हुई है।
अलवर का खजाना – राजा-महाराजाओं और किलों के लिए मशहूर राजस्थान खजानों के लिए भी काफी मशहूर है। राजस्थान के अलवर में एक किले में आज भी खजाना होने की बात कही जाती है। कहते हैं मुगल सम्राट जहांगीर ने इस किले में अपनी संपत्ति का काफी हिस्सा कहीं छुपाया था। बेशकीमती खजाने में हीरे से बना हुआ एक बहुमूल्य कप भी था। इस खजाने को आज तक ढूंढ़ा नहीं जा सका है।
जयपुर का खजाना – अलवर के साथ-साथ जयपुर में भी छुपा हुआ खजाना है। अकबर के सेनापति मानसिंह प्रथम ने अफगान विजय के बाद लूटे गए खजाने को जयगढ़ किले में छुपाया था। इस खजाने की खोज भी आज तक नहीं हो पाई है।



