पांच अगस्त को पूरा देश राममंदिर के शिलान्यास का इंतजार कर रहा है । वहीं इस देश का विपक्ष भी दुर्भाग्य से सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बावजूद भी इस मामले को लेकर कम से कम अपनी अलग राह बनाये हुए हैं । आज भी उस मानसिकता मे ही जी रहे कि इसके विरोध मे ही उनका राजनीतिक अस्तित्व है । इसलिये साकेत गोखले को इलाहाबाद के उच्च न्यायालय मे मुंह की खानी पड़ी है । पर इस देश के अधिकांश मुस्लिम जिन्हे किसी भी राजनीति से मतलब नहीं है वो तो अब पूरी तरह से देश के साथ खड़े है । पर कुछ राजनीतिक तबका है जो अपने सांप्रदायिक राजनीति के लिए जाना जाता है । उनके राजनीतिक बयानों से तो यह लगता है कि वो अभी भी इस मुद्दे को छोडना ही नहीं चाहते हैं । जब कानूनी दांव-पेंच में फैल हो गये तो लाइव प्रसारण पर आपत्ति हो रही हैं । फिर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के वहा शामिल होने पर प्रश्न चिन्ह खडा कर रहे है । मोदी जी प्रधानमंत्री के साथ एक हिंदू भी है । एक हिंदू के नाते उन्हे शामिल होने का पूरा नैतिक अधिकार है । यह बात ओवैसी ने यह बात उठाई है वो ओवैसी जिन्होने स्वंय ने हैदराबाद मे मस्जिद की नींव रखी थी । फिर उनका नैतिक अधिकार यह नहीं रह जाता कि प्रधानमंत्री मोदी जी कैसे शामिल हो सकते है । अब ये पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू जी के सोमनाथ न जाने को लाते हैं । कोई जरूरी नहीं है कि मोदी जी भी वहीं करे जो नेहरू जी ने किया था । ऐसे में तो इनके अनुसार मोदी जी को चीन से बगैर लडें नेहरू जी के समान आत्म समर्पण कर जमीन दे देनी थी । फिर धर्मनिरपेक्षता का पालन ही करना था तो फिर तत्कालीन प्रधानमंत्री को इफ्तार मे भी जाने से बचना था । वोटों के लिए यह धर्म निरपेक्षता का पाखंड करीब पैंसठ सालों तक चला । फिर क्यो नही नवरात्रि पर कभी कोई आयोजन क्यो नही किया गया । अब जैसी खबरें आ रही हैं कि आईएसआई पांच अगस्त को इस कार्यक्रम को सफल नहीं होने देना चाहते । यह वो देश जो अपने देश मे इस्लामाबाद में कृष्ण जी के मंदिर बनने से रोका । अब हमारे यहां राममंदिर बनाने से इनका कोई लेना देना नही है । यह हमारा आंतरिक मामला है । पर उन्हे यह बर्दाश्त नही हो रहा है । अब वो इस दिन जैसे समाचार पत्रों में खबरें आ रही हैं कि कोई बडी कार्यवाही कर सकता है । इसे हमे हल्के मे नही लिया जा सकता है । यह जरूर है कि उत्तर प्रदेश सरकार जहां उस दिन सावधानियाँ जरूर बरतेंगी वहीं केंद्र की एजेंसियां भी सतर्क रहेंगी इसके बाद भी इन्हे हम हल्के में बिलकुल ले नहीं सकते । क्योकि इनके काम करने का तरीका हमेशा अलग रहता है । यह लोग नहीं चाहते कि राममंदिर बने । इसके बाद भी हर भारतीय को लगता है कि इतना होने के बाद भी शिलान्यास का काम सफलता पूर्वक संपन्न होगा । यह भी उल्लेखनीय है कि मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से आतंकवादी घटनाओं पर पूरी तरह से अंकुश मे कर लिया गया है । यही कारण है कि घटनाओं को अंजाम मे देने के लिए सीमा पार के लोगों को दस बार सोचना पड रहा है । इसके बाद भी एजेंसियां अपना काम मुसतैदी से करेंगी । पर यह दुर्भाग्य पूर्ण है कि अपने राजनीतिक मिशन के लिए यह लोग देश का माहौल खराब कर रहे है । निश्चित हम राममंदिर के शिलान्यास की तरफ बढ रहे हैं । सदियों से चले आ रहे इस मामले का सौहार्दपूर्ण रूप से पटाक्षेप हुआ है । यही बात देश के कुछ लोगों को और सीमा के उस तरफ भी स्वीकार नहीं कर पा रहे है । पर उन्हे अब स्वीकार करना ही होगा । कुल मिलाकर अब इस देश के राजनीतिक हालात बदल गए हैं अब वो भारत नहीं रहा । चलो देश मजबूत हाथो मे है पांच तारीख के शिलान्यास की बधाई । बस इतना ही
डा .चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ




