
अभी एक आरटीआई से खुलासा हुआ है कि बच्चो को जो इतिहास से पढाया जा रहा है । उसका सच्चाई से दूर दूर तक का रिश्ता नहीं है। बच्चो को मुगल काल के शहंशाहो का ऐसा यशोगान कर महिमामंडित करने की कोशिश की जा रही है । पर सच्चाई यह है इसमे अंश भर की सत्यता नहीं है। क्यो ऐसा पढाया जा रहा था ? अपने वोटों के लिए इनहोने और अपनी तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के नाम से इनहोने इतिहास के साथ भद्दा मजाक किया है । बाबर जैसे आक्रांता से लेकर औरंगजेब तक जितने भी शहंशाह हुए है उनके कामों पर अच्छाई का पर्दा डालकर उनके दुष्कृत्य को जायज बताने की कोशिश अब लोगों को भी नागवार गुजर रही है । हालात तो यह है कि इनहोने अपने मुगल काल मे अपने ही समाज का भला नहीं किया । उनहे शिक्षा से दूर रखा । इन लोग बच्चो को क्यो अभी तक झूठ परोस रहे थे क्या बाद मे बडे होने के बाद बच्चो को नहीं पता चलेगा ? यही काम इन लोगों ने आजादी के सवतंत्रता संग्राम सेनानी के साथ किया। सिर्फ आजादी के अहिंसा वादियो को ही पढाया जाता रहा पर क्रांतिकारीयो के साथ यहां भी अन्याय किया गया। अब इतिहास का पूर्वावलोकन बहुत जरूरी हो गया है। निश्चित देश के लिए मुस्लिम योगदान को भी सच्चाई के साथ रखा जा सकता है । सच बात पढ्ने से भ्रम की स्थिति नहीं बनी रहती है। पर पता नहीं क्यो इनके योगदान को याद नहीं किया गया। जिन लोगों ने अत्याचार किया नरसंहार किया उनकों पढाकर इन लोगों ने समाज में सिर्फ विद्वेष पैदा किया । इतिहास से ही शुरू किया जाए तो हिंदू मुस्लिम एकता का सबसे बड़ा अगर पैरोकार है तो वो और कोई नहीं औरंगजेब का बड़ा भाई दाराशिकोह था । इस विद्वान ने हिंदूओ के धार्मिक ग्रन्थों को पारसी मे अनुवाद किया । फिर इसे बाद में अंग्रेजी में अनुवाद किया गया। दाराशिकोह एक दार्शनिक था । पर वो अपने शासन मे कुछ और कर पाता औरंगजेब ने उसको भी मरवा दिया। आज हमारे बच्चों को दार्शनिक दाराशिकोह के जगह औरंगजेब को पढवा कर यह लोग गंगा जमुनी तहजीब की कल्पना कर रहे है । औरंगजेब के बारे मे लिखना ही व्यर्थ है । अब उस शख्स को जिसने कृष्ण को एक मुसलिम होकर जिया वो और कोई नहीं कवि रस-खान थे । हिंदू मुस्लिम एकता का इससे बढकर पैरोकार और कौन हो सकता है। फिर हम स्वंतंत्रता संग्राम के काल मे आए । उस समय भी बहुत से मुसलिम स्वतंत्रता संग्राम में बढ चढकर हिस्सा ले रहे थे । इसके पहले मै मुगल काल मे शिवाजी महाराज के समय औरंगजेब से लड़ने मे उनका एक सेनापति मुस्लिम था जिनका नाम दौलत खान था उस सेनापति को महाराज ने सिंधु दुर्ग किले मे जगह दी जिन पर आज भी उनके वंशजों का अधिकार है। वैसे ही अंदमान निकोबार के द्वीप समूह हैवलाक जिसे अब मोदी जी ने स्वराज द्वीप नाम दिया है वहा भी सबसे पहले एक मुसलिम क्रांतिकारी इब्राहीम खान को फांसी की सजा दी गई थी । क्रांतिकारी अशफ़ाक उल्ला खां जिनको अंग्रेजों ने फांसी पर चढाया था उन्हे क्यो याद नहीं किया जाता । मै आजाद भारत के इतिहास में आ जाता हू आजमगढ़ वो आजमगढ़ को आज समाजवादी नेता मो . आजम खान जो आज जेल में उनके नाम से जाना जाता है। जबकि इस आजमगढ़ मे पहले परमवीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर उस्मान भी यहां से थे । मै अपने पाठकों को बता दू कि यह वही ब्रिगेडियर उस्मान है जिन्हे जिन्ना ने पाकिस्तान आने के लिए न्यौता दिया और पाकिस्तान के पहले जनरल बनाने की बात की पर इस महान सैन्य अफसर ने उनकी पेशकश को जूते की नोक पर ठुकरा दिया। मै अब भारतीय सेना का गौरव परमवीर चक्र विजेता हवलदार शहीद अब्दुल हमीद को याद करूंगा जिन्होने पाकिस्तान के टैंक के परखच्चे उडा दिया । मै आज के काशमीर के सेना अफसर सेकंड लेफ्टिनेंट औरंगजेब को जिनको आतंकवादीयों ने षडयंत्र पूर्वक मार दिया । मै काशमीर के पोलिस अफसर शहीद युसुफ पंडित को कैसे भूल सकते हैं जिन्होंने अपने कर्तव्यो को निभाते हुए अपने ही प्रदेश के उग्रवादियों के शिकार हो गये । अब मै भारत रत्न शहनाई वादक बिसमिललाह खान के योगदान को क्यो नही याद किया जाता । संगीत के जरिए अपनी मीठी आवाज से पूरे देश को आज भी मदमस्त करने वाले मोहम्मद रफ़ी को यह अवाम आज भी दिल से याद करता है। उनके गाए गाने हो या भजन लोगों के दिलों दिमाग मे घुस गया है । स्व. नौशाद का संगीत आज भी आनंद देता है । अगर खेल में आता हू तो हाकी टीम के कप्तान जिन्होने शायद आखिरी सवर्ण पदक ओलंपिक में दिलवाया था जफर इकबाल सदाबहार पूर्व विकेट कीपर सैय्यद किरमानी जब मै न्याय के क्षेत्र में जाता हू तो पहली नजर सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और पूर्व उपराष्ट्रपति स्व. मो . हिदायतुललाह के योगदान को देश कैसे विस्मृत कर सकता है । आज भी अगर कोई धर्मनिरपेक्षता के सही मायने मे जी रहे है तो वो है केरल के राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान जिन्होने शाहबानो केस में केंद्रीय मंत्री के पद से राजीव गांधी मंत्री मंडल से इस्तीफा दे दिया था । आज भी वो पूरी शिद्दत के साथ लगे हुए हैं। पूर्व न्यायाधीश स्व. मोहम्मद करीम छागला ने आज से पचास साल पीछे ही उस समय के जनसंघ को एक दिन सत्ता मे आने की घोषणा कर दी थी । कुछ नाम और लू जिसमे आज के रामकथा वाचक राजेश रामायणी जो तन मन धन से कथा वाचन मे समर्पित किये हुए हैं। मै धमतरी जैसे छोटे जिले में भी भी एक शिक्षक दाऊद खान का उल्लेख करना चाहूंगा जिन्होने अनगिनत राम कथा वाचन किया। आज मै धरसींवा के पूर्व सरपंच स्व. बाबू खा जिन्होने अपने कार्यकाल मे बहुत भव्य शिवमंदिर बनवाया । अंत मे मै मिसाइल मैन पूर्व राष्ट्रपति स्व. अब्दुल कलाम आजाद जो देश के लोकप्रिय राष्ट्रपति मे शामिल है । इनके योगदान से देश इनका आज भी ॠण है ।यह सब महान व्यक्तियों के बदौलत सांप्रदायिक सौहार्द बनाने मे इन लोगों की अहम भूमिका रही है । बहुत नाम छूटे है देखो फिर कभी लिखूंगा । मेरा सरकार से अनुरोध है कि इन लोगों को पाठयक्रम मे शामिल किया जाए । मुगल बादशाहों के जख्म पढाकर सांप्रदायिक सौहार्द की कल्पना करना बेकार है । फिर इतिहास का यह झूठ पढाकर क्या कोशिश की जा रही है। निश्चित अब नये भारत मे पाठयक्रम नये सिरे से पढाया जाए । यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है । बस इतना ही डा . चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ




