छत्तीसगढ़राशिफल - अध्यात्म

सोमनाथ मंदिर में स्वयंभू शिवजी की महिमा है निराली, दर्शन से मिलते हैं पुण्य फल, इस बार है खाली खाली

देवाधिदेव महादेव का स्मरण, पूजन मात्र से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। छत्तीसगढ़ में भी एक ऐसा ही पवित्र स्थल है जहां स्वयंभू शिव जी के दर्शन से अनेकों पुण्य मिलते हैं। जिहां छत्तीसगढ़ में रायपुर जिले के पास सिमगा क्षेत्र में एक सोमनाथ मंदिर है, जहाँ श्रद्धालु देवाधिदेव महादेव की आराधना कर अपनी मनोकामना पूर्ण करते हैं। राजधानी रायपुर से बिलासपुर सड़क मार्ग पर भूमिया-सांकरा नामक ग्राम से पश्चिम दिशा की ओर ग्राम लखना स्थित है। इसी ग्राम की सीमा में छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी नदियों में से एक शिवनाथ नदी एवं खारुन नदी का संगम स्थल है। इसी संगम स्थल पर स्थित है सोमनाथ मंदिर।

प्रकृति की गोद में बसा सोमनाथ मंदिर काफी प्राचीन एवं पुरातत्वीय महत्व का है, जहाँ श्रद्धालु वर्ष भर आते हैं और भगवान सोमनाथ के साथ ही साथ अन्य अनेकों मंदिरों में विराजित देवताओं का दर्शन लाभ पाते हैं। पर यहां इस बार कोरोना संक्रमण के चलते पहले जैसा भक्तों का जमावड़ा नहीं दिखाई दिया। आमतौर पर सावन में भक्तों से भरा रहने वाला मंदिर आज खाली दिख रहा है। कोरोना के डर से भक्त मंदिर नहीं आ रहे हैं। सावन के झूले भी खाली दिखाई दे रहें हैं।

गौरतलब है कि महाशिवरात्रि एवं सावन सोमवार जैसे विशेष अवसरों पर लोगों की उपस्थिति देखते ही बनती है। रायपुर के महादेव घाट एवं तिल्दा-नेवरा तथा सिमगा जैसे क्षेत्रों से जल लेकर कांवरिये श्रवण मास में बाबा के जयकारे लगाते पूरे वातावरण को शिवमय बना देते हैं।

आपको बता दें कि यह शिवलिंग स्वयंभू है। धरती से शिवलिंग का उद्यम हुआ है और धीरे-धीरे हर वर्ष शिवलिंग की ऊंचाई बढ़ती ही जाती है। इस मंदिर में आसपास के लाखों लोग नंगे पांव कांवर लेकर अपने मनोकामना पूर्ण के लिए आकर भगवान को जल अर्पित करते हैं। इस मंदिर के पास दो नदियों का संगम हुआ है। सोमनाथ मंदिर न केवल श्रद्धालुओं का श्रद्धास्थल बन चुका है, अपितु ऐसे लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है, जो लोग धर्म-कर्म से परे केवल प्राकृतिक स्थलों पर पिकनिक आदि के उद्देश्य से जाना पसंद करते हैं।

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