छत्तीसगढ़देश विदेश

व्यंग्य – कल तक जो पार्टी ब्राह्मणों पर मनुवादी होने का आरोप लगाते घूम रही थी आज वह ब्राम्हण सम्मेलन करवा रही, वाह

ब्राम्हण हर समय कुछ लोगो के लिए राजनीति का मोहरा जरूर बन जाते है । कल तक जो पार्टी ब्राम्हण पर मनुवादी होने का आरोप लगाते घूम रही थी आज वह ब्राम्हण सम्मेलन करवा रही है । पता नही वह पहले सही थी की  अब सही है । खैर ब्राम्हण पर ही आया जाए ।  ब्राम्हण को विद्वान माना जाता है । रावण भी विद्वान था पर किसी भी ब्राम्हण ने कभी रावण का साथ नही दिया  उल्टा मर्यादा पुरुषोत्तम राम को आराध्य  माना । हमारे आराध्य भगवान श्रीकृष्ण है ।  हम लोगो का मानना है कि कर्म ही प्रधान है ।  यही कारण है कि लोगो ने वाल्मिकी की रामायण को मान्यता दी यही मौलिक रामायण भी है ।  संत तुलसीदास तो बहुत बाद मे आए । वाल्मिकी कौन थे सबको मालूम है पर आज भी वाल्मिकी जी पूज्य है ।  पहले यह सब कोई नही देखता था । हो सकता है कुछ लोगो ने अपनी प्रभुत्व के  लिए छुआछूत जैसे गलत परंपरा को बढाया जो गलत था गलत है ।  पर आज के भारत मे इस पर अंकुश लगा हुआ है ।  समाज मे मतभेद सिर्फ आज के समय राजनीतिक महत्वाकांक्षाओ के कारण ही है । अन्यथा किसी को क्या पडी है ।  उल्लेखनीय है बाबा साहब आंबेडकर जी की कुशाग्र को देखते हुए उनके ब्राम्हण गुरुजी ने अपना सरनेम तक बाबासाहब जी को दे दिया।  ।   तब से वो आंबेडकर कहलाए  ।  बाबा साहब की दूसरी पत्नी भी ब्राम्हण थी । अगर ब्राम्हण मे यह सब होता तो यह संभव था ?  आज कौन चिकित्सक क्या है कौन वकील क्या है न ग्राहक पूछता है वकील चिकित्सक यह सिर्फ समाज मे वैमनस्य फैलाने वाले ही करते है । क्योकि उन्हे समाज की राजनीति करनी है । फिर उसी समाज को अधूरा भी छोड देता है । खैर नेता हो या बालीवुड सबको इस समाज को विलन बनाना है और छबी खराब करना है ।  पर सच्चाई दिखती है तो फिर वे लोग अपने मिशन मे सफल नही हो पाते । पर तय है कि इस समाज के लोगो ने भी स्वतंत्रता संग्राम से लेकर देश के आजादी के बाद अपनी अहम भूमिका निभाई है ।  आज भी यह लगे हुए है । बस सामाजिक सौहार्दपूर्ण स्थिति के लिए सबकी अपनी भूमिका है ।  अच्छा होता हम पहले अपने को देखे बाद मे किसी और के लिए कुछ कहे । जब किसी धर्म मे विभाजन होकर भी विभाजित नही है तो हिंदूओ मे यह कोशिश क्यो होती है यह समझ से परे है ।  पर यह भारत भी वह भारत नही रहा राजनीति के लिए कुछ समय के लिए भले सफल हो जाए पर लंबी राजनीतिक पारी नही रहती ।  अच्छा होता हम राष्ट्र निर्माण मे अपनी अहम भूमिका निभाए।  बस इतना ही
डा.  चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ 

Guru Purnima Special article by Dr Chandrakant Ramchandra wagh

Related Articles

Back to top button