छत्तीसगढ़

राजनादगांव – आत्मा के उत्थान के लिए जरूरी है दीक्षा – cgtop36.com


राजनादगांव — आत्मा के उत्थान के लिए दीक्षा जरूरी है गृहस्थ जीवन में रहकर निर्मल तरीके से संयम की राह पर नहीं चल पाएंगे इसलिए 22 मई को राजस्थान जयपुर में गुरु के सानिध्य में सुराणा परिवार दंपत्ति दीक्षा लेंगे बालाघाट निवासी राकेश सुराणा ,लीना सुराणा एवं उनके पुत्र अभय सुराणा गृहस्थ जीवन त्याग कर स्वयं की राह पर चलने की ठानी है दीक्षा से पूर्व सुराणा परिवार ने प्रेस वार्ता लेकर जानकारी दी है।

प्रेसवार्ता के दौरान सुराणा दम्पति के साथ उनके परिजन ताराचंद नाहटा,नरेंद्र नाहटा,वृषभ नाहटा सहित अन्य उपस्थित थे। बालाघाट निवासी राकेश सुराणा,लीना सुराणा एवं उनके पुत्र अभय सुराणा गृहस्थ जीवन त्याग कर संयम की राह पर चलने की ठानी है, जयपुर में श्री महेंद्र सागर जी म.सा. मनीष सागरजी म.सा.एवम साध्वी प्रभा श्री जी म.सा. के सानिध्य में 22 मई को राजस्थान जयपुर में दीक्षा ग्रहण करेंगे।

दीक्षा से पूर्व सुराणा परिवार अपने नाना मामा परिवार राजनांदगांव के यहा पहुचे। पत्रकार वार्ता के दौरान राकेश सुराणा ,लीना सुराणा एवं उनके पुत्र अभय सुराणा ने संयुक्त रूप से कहा कि पूर्व में बालाघाट में महेंद्र सागर जी मनीष सागर जी का चातुर्मास हुआ था इस दौरान उनके विचारों से उनका परिवार काफी प्रभावित हुआ उन्हें पता चला कि जन्म मरण के चक्र से बाहर निकलकर आत्मा के उत्थान के लिए दीक्षा जरूरी है.

शरीर को आत्मा छोड़ दे उनसे पहले आत्मा को स्वच्छ बनाने संयम की राह पर चलने के लिए उनके परिवार ने मन बना लिया है इस दौरान उन्होंने भगवान महावीर के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने जो बताया है वह आनंदमय है इसी मोटिवेशन के साथ में आगे बढ़ रहे हैं।





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