विशेष लेख – चुनाव बनाम हर्रा लगे फिटकरी रंग चोखा -डॉ वाघ की वाल से – cgtop36.com

डा वाघ की वाल से आज अपनी बात पर बस विधानसभा और लोकसभा के चुनाव को करीब सिर्फ दो साल बचे है तो नेताओ व दलो ने तो अपनी तैयारिया शुरू कर दी है । अगर नही भी कर रहे होंगे तो सोच भी जरूर रहे होंगे । फिर मेरे मन मे सवाल आया एक जागरूक मतदाता की हैसियत से लोकतंत्र के इस पर्व पर हमे भी अपनी तैयारिया शुरू कर देनी चाहिए। मै हर समय भगवान से अपने सियासत दानो के लिए प्रार्थना करते रहता हू । मुझे गर्व है सभी सियासत दान एक से बढ़कर एक है । बस आपके मुंह से निकल जाए तथास्तु। पहले तो बगैर बोले इतनी सेवा की लोग गदगद हो जाते थे भंडारा खुल जाता था पियो नहाओ जो भी खाना खाना है खाओ कोई भेदभाव नही बडे से बडे भैय्या बडे प्यार से जब कंधे पर हाथ रखते थे तो उस अहसास को जिंदा रखने के लिए महीनो नहाने की इच्छा नही होती थी । पर यह सिलसिला काफी लंबा चला । पर राजनीतिक परिवर्तन होने लगे नये नये राजनीति के शूरमाओ का प्रवेश होने लगा । लोगो को भी लगा की अच्छा व्यवसाय है बस थोड़ा-बहुत दिमाग लगाने की आवश्यकता है । बस एक बंदे ने थोडा दिमाग लगाया पूरे देश मे ही आंदोलन खड़ा कर दिया । तारीफ करनी होगी कंधा किसी का पैसा किसी का और खेल किसी का । कुल मिलाकर हररा लगे न फिटकरी रंग चोखा । कसम से परिणाम ही सामने आ गया । बस यह तो शुरुआत है बगैर पैसे के राजनीति के करने की इसे अब आगे भी बढाना इससे ज्यादा चुनौतीपूर्ण काम था । जिन लोग अघोषित दानदाता थे अब राजनीतिक माहौल ऐसा हो गया की यह लोग अब लिखित दान को कर अपने घोषणापत्र मे शामिल करने लगे । पर तारीफ करनी होगी इन्होने अपने पुराने परंपरागत दान के तरीको मे कोई कटौती नही की । मुझे फख्र है की मै विश्व के सर्वोत्तम लोकतंत्र का हिस्सा हू और इसमे जी रहा हू । घोषणापत्र मे शामिल कर यह लिखित दान देकर वह भी पांच साल के लिए यह कोई मामूली बात नही है । वही कर्ज को पूरा माफ कर यह संदेश देने से भी नही चूकते की कर्ज लेकर आपको पटाने की कतई आवश्यकता नही है । फिर मुझे भी लगने लगा की मै ही क्यो इन लोगो को अपनी सेवा करने का अवसर नही देता । पहले लगता था की कोई भी वोट मांगने क्यो नही आता बात सही भी है क्यो कोई आये । न पीते हो न नहाते हो न कर्जा फिर कोई आकर करे तो क्या करे ? फिर मैने गंभीरता पूर्वक विचार करने के बाद फैसला लिया की अपनी औकात से ज्यादा कर्ज लेकर यह सुनहरा अवसर भैय्या और इन राजनीतिक दलो को दे ही दू । वही थोड़ा पीना भी सीख ही लू । ऐसा करने से कर्ज माफ करते इन सियासत दानो के साथ कई फोटो भी सुर्खिया बनेंगी इसी बहाने सब भैय्या लोगो का आना जाना भी चालू हो जाएगा जिससे वे लोग मेरी कुशल क्षेम पूछ सके वही कर्ज अदायगी का वह राजनीतिक अहसास उन्हे भी महसूस हो सके । इस पर जितना लिखा जाए कम है । पहले के जमाने मे तो एक ही कुंती थी जिसने अपने बच्चो के प्राणो की रक्षा के लिए दानवीर कर्ण से कवच कुंडल मांगा था । पर मुझे गर्व है की मेरे देश के हर पंचायत दानवीर कर्ण से भरी पड़ी हुई है । बस आपके मांगने का या इशारा देने की आवश्यकता है । वो दिन भी दूर नही चुनाव के पहले बडे बडे स्टोर सभी के आफिस वाले ऋण माफी के सारटफिकेट का स्टाल लिए बैठे मिलेंगे । कितनी सुविधा चाहिए बस उस दिन का इन्हे इंतजार है जब इन्हे वह तिलस्मी दिया हाथ लग जाए जिसके घसने पर जिन्न खडा हो हुकुम मेरे आका बस यह दिया हर मतदाता को देकर उसे किसी भी तकलीफ मे नही रखना चाहते है । बस शोध चालू है जिस दिन हो जाएगा कोविड के टीके की भांति यह भी दे दिया जाएगा । पर धैर्य तो रखना होगा तब तक कोई और दानवीर कर्ण आ जाए जो हर मतदाता के घर निःशुल्क दारू की पाइप लाइन बिछवा दे और एक चखने का स्टाल ही स्थायी लगवा दे तो वह दिन भी दूर नही । देश के किसी भी घर मे कोई भी जाए तो इन नेताओ द्वारा दिया हुआ घर जिसमे बिजली पानी गैस शराब से सुसज्जित पाइप लाइन दिया हुआ घर चर्चा का विषय बना रहेगा । अगले चुनाव का इंतजार करे चार चक्के वाली वह गाडी जिसके आप सपने देखते हो माॅडल भी आपके मुताबिक साथ मे पांच साल के एडवांस पेट्रोल वाउचर की सुविधा के साथ एक दल व उसके नेता उतरने वाले है । इस देश को यूं ही सोने की चिडिया नही कहा गया । बस उस दिन का ही इंतजार है सत्ता के लिए कौन सा दानवीर कर्ण है जो इस देश के ही कवच कुंडल को देकर अपना नाम इतिहास मे अंकित करना चाहता है ।
बस इतना ही
डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ



