छत्तीसगढ़

अब स्कूलों में लागू होगा छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम, तैयार हो रहा व्याकरण

बालोद और दुर्ग जिले के शिक्षक को शासन ने व्याकरण का जिम्मा

राज्य सरकार ने स्थानीय बोली भाषा को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों में भी इसकी पढ़ाई शुरू करने का फरमान जारी किया है। जिसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। बालोद और दुर्ग जिले के शिक्षक को शासन ने व्याकरण का जिम्मा सौंपा है। यहां के शिक्षक डाइट केंद्र दुर्ग में छत्तीसगढ़ी व्याकरण पर काम कर रहे हैं।

हिंदी के ही शब्दों से छत्तीसगढ़ी व्याकरण तैयार किया जा रहा है। अगले शिक्षा सत्र से ही इसे स्कूलों के पाठ्यक्रम में लागू करने की तैयारी चल रही है। जिले के शिक्षकों की भी भागीदारी इस पाठ्यक्रम की तैयारी में है।

यहां से पूर्व माध्यमिक शाला चिचबोड़ (गुंडरदेही) के शिक्षक द्रोण कुमार सार्वा व कोड़ेकसा हायर सेकेंडरी स्कूल के शिक्षक जयकांत पटेल भी पाठ्यक्रम तैयार करने में अपनी सहभागिता दे रहे हैं। डाइट केंद्र दुर्ग में छत्तीसगढ़ी व हिंदी शब्दकोष निर्माण में रायपुर डाइट का भी सहयोग लिया जा रहा है।

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान दुर्ग के सहयोग से छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास व भाषा शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण संदर्शिका “भाखा गुड़ी तैयार किया गया था। जिस पर दिसंबर में झलमला में पांच दिवसीय प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। इस पुस्तिका के जरिए भी अब छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम को तैयार करने का आईडिया निकाला गया है। जिसमें अंचल के लोक साहित्य, लोक गीत, लोक नाट्य, लोकगाथा, लोक कथा के साथ भाषिक तत्व व व्याकरण सम्मत जानकारी दी गई है।

इसी पुस्तक से भी कई शब्दावली तैयार करके व्याकरण तैयार किया जा रहा है। द्रोण कुमार सार्वा का मानना है कि अपनी भाषा में बच्चे निसंकोच बिना भय के अपनी बात रखेंगे और उन्हें सीखने का बेहतर माहौल मिलेगा। देश के महान शिक्षाविदों महात्मा गांधी, रविंद्र नाथ टैगोर, गिजूभाई भी मातृभाषा के पक्षधर रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2005 में भी मातृभाषा में शिक्षा देने के लिए बात कही गई थी।

स्थानीय भाषाओं में वर्णमाला चार्ट तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा स्थानी कहानियों, गीतों का संग्रह भी होगा। प्रिंट समृद्ध वातावरण के निर्माण के साथ सुझावात्मक डिजाइन भी रहेगा।

शिक्षाविदों का मानना है कि छत्तीसगढ़ी व्याकरण लोक साहित्य और लोक संस्कृति सम्मत एक ऐसी जन भाषा है, जिसे छत्तीसगढ़ के दो करोड़ से भी ज्यादा लोग मातृभाषा-संपर्क भाषा के रूप में प्रयोग करते हैं। जिस प्रकार ओडिशा में उड़िया, महाराष्ट्र में मराठी, पश्चिम बंगाल में बांग्ला, गुजरात में गुजराती, केरल में मलयालम भाषा में प्राथमिक शिक्षा दी जाती है।

डाइट के प्राचार्य डीके बघेल, व्याख्याता वेंकटरमन मूर्ति के निर्देशन व समन्वय के साथ लेखक मंडल में द्रोण कुमार सार्वा, प्रवीण लोणहारे, जयकांत पटेल की सहभागिता है। पूरा काम एससीईआरटी के संचालक आईएएस पी. दयानंद के निर्देश पर भी हो रहा है।

इस पाठ्यक्रम को भाषा शिक्षण के उद्देश्य, छत्तीसगढ़ी भाषा में शिक्षण भाषा, सीखने की प्रक्रिया, वर्णमाला व व्याकरण, लोक साहित्य, सामान्य परिचय को शामिल किया गया है।

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