दुर्ग- रसूखदार कर रहे ताबड़तोड़ अवैध प्लाटिंग, प्रशासन सोया कुंभकर्णी नींद – cgtop36.com

अवैध प्लाटिंग के मामलों पर रजिस्ट्री शून्य कर जमीन राजसात करने जैसे ठोस कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन जिला प्रशासन अब तक अवैध प्लाटिंग पर रोक और पकड़े गए दोनों मामलों पर कार्रवाई में फिसड्डी ही रहा है। इसका फायदा अवैध प्लाटिंग कर बेजा कॉलोनी खड़ा करने वाले उठाते रहे हैं। शासन प्रशासन की नरम रूख के कारण इसमें और भी तेजी आई है। जिन मामलों में कार्रवाई भी हो रही है, उनमें केवल फेंसिंग हटाकर अथवा सड़कें खोदकर खानापूर्ति चल रही है।
सरकार ने 5 डिसमिल से छोटे प्लाट की रजिस्ट्री पर बंदिश हटा ली है। इसके बाद से अवैध प्लाटिंग के मामलों में जबरदस्त तेजी आई है। इसके साथ ही छोटे प्लाटों की खरीदी-बिक्री भी बढ़ी है। पिछले कई महीनों से सामान्य की तुलना में 3 से 4 गुना रजिस्ट्री हो रही है।
अवैध प्लाटिंग के मामले में पिछले कुछ महीनों में केवल भिलाई इलाके में कुछ कार्रवाई की गई है। यहां भी अवैध प्लाटिंग वाले स्थलों में जाकर केवल फेंसिंग हटाने और मार्किंग के लिए तैयार किए गए सड़कों को जेसीबी से खोदकर खानापूर्ति कर ली गई। अवैध प्लाटिंग पर परमानेंट रोक के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
बिना अनुमति व ले आउट प्लाटिंग अवैध माना जाता है। पंचायती राज अधिनियम की धारा 61 व भूमि का अधिग्रहण व प्रबंधन अधिनियम की धारा 292 ग एवं 292 (5) में ऐसे जमीन का अधिग्रहित कर शासकीयकरण का प्रावधान है। जमीन की चाहे प्रमाणीकरण भी करा लिया गया हो रजिस्ट्री शून्य घोषित कर शासन के पक्ष में राजसात किया जा सकता है।
5 साल तक सजा का है प्रावधान
बिना अनुमति व ले आउट की प्लाटिंग पंचायती राज अधिनियम 1993, नगर पालिक निगम अधिनियम 1956, छग भूमि विकास अधिनियम 1984 व ग्राम निवेश अधिनियम में अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में रजिस्ट्री शून्य घोषित करने और जमीन के शासकीयकरण के साथ 5 साल सजा व 5 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान है।




