कोविड मे भी रावण मरेगा। मै कुछ दिनों से फेसबुक में और दूसरे सोशल मीडिया के माध्यम से हमारे धर्म निरपेक्ष हिंदूओ व प्रगतिशील विचारों के हिंदूओ की चिंता की इस समय कोविड के समय रावण को कैसे मारा जाएगा । कुछ ज्यादा ही प्रगतिशील लोगों ने एक सलाह दे डाली कि रावण को आत्म हत्या कर लेनी चाहिए। मेरे को ऐसे हिंदूओ के विचारों पर बुद्धि पर तरस आता है कि इन्होंने धर्म को ही नहीं समझा है । इन लोगों को बता दू कि रावण के वध की परंपरा पुरानी तो है । वहीं इस परंपरा को मुगल शासक भी आए वो भी इसे बंद नहीं करा पाए । वहीं अंग्रेज आए वैसे उनहोंने संस्कृति से कभी छेडछाड नहीं की पर वो भी इस परंपरा को बंद नहीं करा पाये । इस देश का दुर्भाग्य है कि जयचंदो और विभीषणो की फसलों ने ही इस देश को नुकसान पहुचाया है और इतनी सदी तक गुलाम बनाया है । यह लोग अपनी दिवालिया मानसिकता से कभी बाज नहीं आ सकते । इन्हे अपने धर्म को कब नीचा दिखाने का कभी मौका छोडना नहीं चाहते । इनमें इतना नैतिक साहस भी नहीं रहता कि अगर धर्मनिरपेक्षता का चोला ओढते है तो दूसरे धर्म के बारे मे भी बोलने की हिम्मत करे । मेरे को तो इनके परवरिश में ही खोट नजर आती है । आलोचना करना है तो इसके पहले उन्हे इसके बारे मे पूरी जानकारी रखनी चाहिए। जिन लोगों को अपने धर्म के बारे मे नही मालूम है उन्हे तो अपना मुंह खोलने के पहले दस बार सोचना चाहिए। जिन लोगों के परवरिश में ही संस्कृति का खोखला पन हो उनके बारे मे कुछ कहना ही बेकार है। मै सब इसलिए लिख रहा हू कि जानबूझकर ही कहना चाहिए कि कहा गया कि कोविड के समय रावण को कैसे मारा जाएगा। इसलिए रावण को ही आत्म हत्या कर लेनी चाहिए। यह बात मुझे चुभ गई । क्योकि इस बहाने इनहोने हमारी संस्कृति के साथ हमारे धर्म का अपमान किया है । लो इनका कहना कि रावण को आत्म हत्या कर लेनी चाहिए। यह वो रावण है जो डरपोक नहीं था जिसने युद्ध में अपने परिवार को खोया राज्य भी हाथ से जाता दिख रहा था ( भले रावण गलत था ) फिर भी विद्वान तो था । उसे मालूम था कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम के हाथो ही मोक्ष की प्राप्ति है । इसलिए राम के हाथो ही वध हुआ। पर हम हजारो साल से रावण का वध नहीं करते है और हमारा मानना है कि उसमें जो अहंकार बसा था हम उसका वध करते हैं। हमारे मे वो अहंकार न आ पाये । यह सब विद्वान लोगों के दुर्भाग्य जनक कमेन्टस पढने के बाद ही मेरे से रहा न गया। दुर्भाग्य से कुछ लोगों ने तो हमारे धर्म का मजाक उड़ाने का धंधा सा बना लिया है। जब तक इनके प्रश्नों के उत्तर इन्हे अभद्र भाषा में न दिये जाए तब तक इनकी अक्ल ठिकाने नहीं आती। मै इन्हे बताता हूँ कि आत्महत्या अभी वो करने वाला है जिसकी परवरिश मे खोट है । आत्महत्या वो करने वाला है जो पूर्ण रूप से मानसिक दिवालिया पन के कगार पर आकर खडा है । आत्म हत्या वह करने वाला है जिसको अपने धर्म पर ही संदेह की दृष्टि से देखता हो । यह लोग निश्चिंत हो जाये अभी भी राष्ट्रवादी विचारधारा के लोग हैं जो पूरे अपने कोविड के गाइड लाइन का पालन करते हुए रावण वध के लिए सक्षम हैं। मै इन्हे बताता चलूँ कि सबसे ज्यादा पश्चिमी देशों में विस्तार करने वाला हिंदू धर्म ही है। अगर ऐसे खोखले मानसिक वाले लोग रहे न रहे इस धर्म को कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता। इस समय और जोरो से रावण का वध होने वाला है क्योकि राममंदिर का निर्माण शुरू है । वहीं डी डी चैनल मे अयोध्या से रामलीला का प्रसारण शुरू है । मै ऐसी ताकतों को आगाह कर दू कि इस समय का दशहरा इनके हर प्रश्नों के उत्तर इन्हे मिलेगा। दोस्तों दशहरे की बधाई के साथ बस इतना ही । जय श्री राम
डा . चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ




