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गरियाबंद जिले में यहां की महिलाएं तालाब में 5 फिट झरिया खोद प्यास बुझाने में मजबूर, ये कैसा विकास

प्रतीक मिश्रा गरियाबंद– छोटे छोटे बच्चों को इस चिलचिलाती झुलसती गर्मी में घर में छोड़ तालाब किनारे खोदे गए झरिया में जाना इस गांव की महिलाओं का नसीब है वो भी इसलिए कि वह परिवार और अपनी प्यास बुझा सके। जिहां हम बात कर रहें हैं गरियाबंद जिले की।

यहां ग्राम पंचायत कुमडीह कला के आश्रित गांव करलाबंदली में ग्रामीण पिछले कई दशको से 1 किलामीटर सफर कर तालाब किनारे 5 – 6 फिट झरिया खोद कर घंटो इंतजार के बाद महिलाएं पानी भर सकते हैं तब जाकर इनकी प्यास भुझती है।

ग्रामीण तरुण बीसी की माने तो, गांव के लोगो कई दशकों से, ऐसे ही तालाब किनारे गर्मी के दिनों में 5- 6 फिट झरिया खोद कर अपनी प्यास बुझाने में मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस बाबत जानकारी लगातार जनप्रतिनिधियों को और शासन प्रशासन को देने के बाद भी अभी तक इसकी सुध लेने कोई नही पहुँचे है।

क्या कहती है महिलाएं

अगर ग्रामीण महिलाओं की बात मने तो उनके एक मटकी पानी के लिए कोसो दूर का सफर तय करना पड़ता है, तब जाकर उन्हें एक मटकी पानी घंटो इंतजार के बाद मिलता है। महिलाओं ने कहा कि इतनी तपतपाती धूप में पानी ले जाने के लिए बहुत परेसानी का सामना करना पड़ता है। छोटे छोटे बच्चों को घर मे छोड़कर आते हैं और घंटो इंतजार के बाद, पानी नसीब होता है।

ग्रामीणों का कहना है कि 150 लोग गांव में निवास करते करते हैं उसमें सिर्फ एक नलकूप है एवं वहाँ के पानी में तय मापदंड से अधिक आयरन पाए जाने के कारण उस नलकूप के पानी से खाना बनाना तो दूर वह पीने योग्य भी नही है।

मामले में जब सरपंच से बात किया गया तो सरपंच सजमानी ध्रुवा का कहना है कि मैने समस्या को खुद जाके देखा और समस्या के बारे पीएचई विभाग को अवगत करा दिया है, अधिकारी अगर जल्द ही उचित कदम नहीं उठाये तो आगे उच्च अधिकारियों को अवगत कराऊँगी।

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