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जगन्नाथपुरी के मंदिर का ध्वज जब जल उठा धूं धूं कर, लोगो की उमड़ी भीड़

जगन्नाथ मंदिर के ऊपरी हिस्से में लगाया जाने वाला ध्वज अचानक जल उठने से श्रीमंदिर परिसर में हड़कंप मच गया। जलते हुए ध्वज को देखने को भीड़ उमड़ पड़ी। हालांकि कोरोना के कारण 31 मार्च तक श्रीमंदिर के कपाट भक्तों के लिए बंद रहेंगे। सेवायत पहले की तरह रीतिनीति करते रहेंगे।

श्रीमंदिर का ध्वज रोज चार से पांच बजे शाम को बदला जाता है। एक सेवायत ऊपर जाकर ध्वज बदलता है। यह पवित्र दृश्य देखने को लोग उमड़ पड़ते हैं। सेवायत के हाथ में एक जलता हुआ दीपक भी था। बताते हैं कि लापरवाही के चलते ध्वज में आग लग गयी। इसको लेकर लोगों में तरह तरह की भावनाएं नजर आई।

मिली जानकारी के मुताबिक गुरुवार को पाप नाशक एकादशी के उपलक्ष्य में श्रीमंदिर के अंवला परिसर में महादीप लगाया गया था। अचानक तेज हवा चलने से ध्वज उड़कर महादीप पर चला आया और देखते ही जल गया। इसके बाद श्रीमंदिर प्रशासन ने चुनरा सेवकों को वहां भेजा और स्थिति सामान्य की।

आपको ध्वज से जुड़ी एक रहस्यमय बात यह भी है कि यह हवा के विपरीत दिशा में उड़ता है। जिस दिशा में हवा चलती उसकी उलटी दिशा में ये झंडा लहराता है। यह झंडा 20 फीट का तिकोने आकार का होता है जिसे बदलने का जिम्मा एक चोला परिवार पर है।

यह परम्परा 800 सालों से चली आ रही है। कहा जा रहा है कि अगर झंडा रोज़ ना बदला जाए तो मंदिर 18 सालों के लिए अपने आप बंद हो जायेगा। आप देख सकते हैं मंदिर के शिकार पर एक सुदर्शन चक्र भी है जो दूर से ही दिखाई देता है। इस चक्र की खास बात ये है कि इसे जहां से भी देखो वो आपको अपनी ओर ही दिखाई देगा।

इस मंदिर के झंडे को बदलने के लिए एक पुजारी मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर जंजीरों के सहारे चढ़ता है। उससे पहले वह नीचे अग्नि जलाता है और धीरे-धीरे मंदिर के गुंबद तक पहुंच कर पुराने ध्वज को हटाकर नए ध्वज को लगा देता है। चाहे जैसा भी मौसम हो इस झंडे को बदलने का रिवाज है जिसे रोज बदलना होता है।

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