पूरा देश स्तबध है सीआरपीएफ के बाइस जवान शहीद हो गये। नक्सली समस्या करीब चार दशकों से है । पता नही क्यो इसके मुकाम तक आज तक नहीं पहुंचा गया । राज्य मे किसी की भी सरकार हो पर इस समस्या पर कभी गंभीर होते नहीं देखा गया । विगत चालीस साल से नक्सल समस्या के कारण यहां विकास भी नहीं हो पा रहा है । आज भी कोई शासकीय सेवा में जाना नहीं चाहते अगर कोई है तो उसका लौटना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि यहां के शासकीय कर्मचारियों के तनख्वाह में साफ अंतर दिखाई देता है । खैर अब मुद्दे पर आया जाए चार दशक तक यह नक्सल समस्या कैसे बनी हुई है ? नक्सली को आर्थिक सहायता कौन प्रदान कर रहा है । आर्थिक सहायता के साथ यह आधुनिक हथियार कहां से मिल रहे है । कहते है राकेट लांचर तक इनके पास है । वहीं मानवता के नाम से इनको जो समर्थन टुकड़े टुकड़े गैंग का मिलता है । वहीं मानवाधिकार के नाम से भी अपनी राजनीति को चमकाने वाले तथाकथित बुद्धिजीवी भी शामिल है । यह लोग ही है जो उन्हे सुरक्षा प्रदान करते है । दुर्भाग्य से यह लोग यहां तक ही सीमित नहीं है इनकी पहुंच प्रशासन तक भी है ऐसा कहना सुरक्षा विशेषज्ञों का है । उनका यह कहना कि कैसे नक्सलियों को पता चलता है कि पैरा मिलिट्री फोर्स यहां से गुजरने वाली है । जिससे उन्हे अपने कार्यवाही को अंजाम देने मे सहायता मिल जाती हैं । पहले तो इस तरह से बैठे हुए मीरजाफर और जयचंदो को पहचानने की आवश्यकता है । वहीं शहरी नक्सली भी इस तरह के बडे अंजाम को कार्यरूप मे परिणित करने मे अपने तरफ से द्रोणाचार्य की भूमिका मे हर समय नजर आते है । नक्सली हमले मे सैनिकों का शहीद होना आम बात है । पर आज से सात साल पहले जो नक्सली हमला हुआ जहां राष्ट्रीय स्तर के नेता भी शहीद हुए न उसकी जांच लोगों को पता है तो सजा की बात करना ही बेकार है । शहीद पं विधाचरण शुक्ल मध्यप्रदेश के पूर्व गृहमंत्री रहे शहीद नंदकुमार पटेल शहीद उदय मुदलियार शहीद शर्मा आदि नेता इस हमले से शहीद हुए वहीं बहुत नेता घायल हुए । पर ऐसा लगा था उसमे कि यह समस्या अब जड से ही खत्म हो जाएगी । पर इस हमले के बाद भी यह समस्या का बने रहना निश्चित रूप से हमारी राजनीतिक दूर दृष्टि की कमी को दिखाता है। पहले रमन सिंह की सरकार थी तो केंद्र में यूपीए वहीं आज केंद्र मे एनडीए है तो यहां कांग्रेस पर हालात मे कहां कोई फर्क है । नक्सलियों को राजनीतिक समर्थन उनके हौसले की अफजाई करते है । पहले बार नक्सली हमले के बाद देश के गृहमंत्री श्री अमित शाह जी का दौरा इस हमले की गंभीरता का अहसास कराता है। शायद आने वाले दिनों में कोई स्पेशल रणनीति के तहत काम हो तो कोई आश्चर्य नहीं यह समस्या जड से खत्म हो जाएगी । बस अब लोग तंग आ गये है इनके पूरे नेटवर्क को खत्म करने का समय आ गया है । इससे देश प्रदेश दोनो मुक्त हो जाऐंगे । निर्णायक लडाई का समय है काश्मीर का आतंकवाद खत्म हो सकता है तो यह भी खत्म न हो सके यह कोई बडी बात नहीं है । गृहमंत्री शाह जी कथन काफी मायने रखता है कि यह समस्या अब खत्म हो जाएगी । इसी विश्वास के साथ । बस इतना ही
डा . चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ




