हम सौभाग्य शाली है कि हमें कहने में बोलने मे गर्व महसूस होता है कि हम किसी भी चीज को ज्यादा उपयोग करने मे हम अपनी तौहीन समझते हैं । जो देश सोने की चिड़िया रहा हो उस देश की अवाम की भी जिम्मेदारी है कि ऐसे बातो का ख्याल रखें कि सोने की चिडिया को ज्यादा दिन तक नहीं रहनी चाहिए । इस लिए हर समय हमे नई वस्तुओं का इस्तेमाल करना चाहिए।
चलिए चालू करे हम सबसे पहले सुदृढ लोकतंत्र की बात करते है । बडे सुरक्षा वयवस्था चुनाव संपन्न कर हम इन माननीय को निर्वाचित करते है पर इनके इरादो की तारीफ करनी होगी जनता इनको जिसके खिलाफ चुनौती है या ये जिसके खिलाफ चुनाव लड़ते है कुछ समय बाद यह बडे दिल वाले माननीय उनके होकर रह जाते है । यह हमारे देश की लोकतंत्र की खूबसूरती है ।
आश्चर्य होता है पहले यह अपने लोगों पर ही भ्रष्टाचार का आरोप लगाते है फिर विपक्षी दलों पर आरोप लगाते है । यह दुखद है इनको भी मालूम है ये अपने सिद्धांतों के लिए अपनी कुर्सी तक त्यागने को तैयार रहते हैं । आत्मीय स्वभाव के चलते ही ये लोग विपक्ष के हो जाते है जिसमें इनके ही कल तक साथी रहे भ्रष्टाचार का आरोप लगाये तो यह शोभा नहीं देता । जब अपने कामों पर बगैर कुछ खर्च किए यह चुनाव लड़ते है तो फिर भ्रष्टाचार क्यो करेंगे ? माननीय कभी भी गलत और भ्रष्ट हो सकते है यह अपने ही आप मे हास्यापद है । ऐसा कर ये अपने ही साथियों का चरित्र हनन कर रहे हैं ।
इस देश का गौरवशाली लोकतंत्र जिसमे कई जनप्रतिनिधि माननीय लोग इसकी रक्षा करते हुए जेल तक गये है । इनके चरित्र के बारे मे मेरे विचार से स्कूल के पाठयक्रम मे भी रखने का विचार किया जाना चाहिए । सत्तर साल के इतिहास मे बहुत से ऐसे माननीय है जिनके कृतयो ने ही इस लोकतंत्र को महान बनाया है ।
किसी पर बलत्कार कर पूरे परिवार को मारने का महान कार्य करने के कारण ही इन्हे माननीयो को अपने विशेषाधिकार की रक्षा करने के चलते जेल यात्रा तक करनी पड रही हैं । अभी जो मध्यप्रदेश में हुआ और अब राजस्थान मे जो हो रहा है उस पर किसी भी नागरिक ने प्रश्न चिन्ह खडा नहीं किया है । दुर्भाग्य से भ्रष्टाचार के आरोप भी साथी लोग ही लगा रहे है ।
लोकतंत्र के लिए इन लोगों की प्रतिबद्धता को देखकर तो मै नतमस्तक हू कि अपने घरबार को छोड़कर पंच सितारा होटल मे कितने भारी मन से इन लोग रहते हैं । वहीं लोकतंत्र के नाम से एक दूसरे के विरोधीयो मे जो मेल मिलाप अभी देखने को मिल रहे है यह सामाजिक सौहद्रता का सबसे अच्छा उदाहरण है । यह अपने दुश्मनों के लिए बडे दिल का उदाहरण है ।
वहीं मै इनके भाषा की बात करूंगा तो जितनी गाली-गलौज को सुंदरता के साथ अमर्यादित भाषा मे दबंगाई के साथ दिखते हैं वो इस पद की शोभा को और बढाते है । वहीं मै इनके उस बाहुबली के रूप को देखता हूँ तो हर कोई इस रूप को देखकर अचंभित हो जाता है । लोकतंत्र के मंदिर मे माईक उखाड़कर फेंकना वहीं कुर्सी तक फेकना कितना ये हमारे लिए करते है ।
वहीं इनके ऐंग्रीयंग मेन की भूमिका में दिखाई देते है तो पिक्चर का सीन दिखाई देता है । इनका एक रूप जिससे हर लोगों का वास्ता पडता है जिसको इस देश का हर नागरिक अपना धरोहर मानता है वो है आश्वासन । इन्ही लोगों का सार्थक प्रयास रहता है कि हमे नये रंग रोगन मे दूसरी सरकार मिल जातीं हैं । यह हमे संदेश देते है भले वो हमारा दुशमन हो भाई चारे के साथ रहना चाहिए मिलकर रहना चाहिए । मै एक बात आज के संदर्भ में कहना चाहूँगा जब अभिताभ बच्चन जी तिहतर साल मे अभिनय कर सकते हैं तो इसी किरदार मे अपने कर्तव्यो को नेता क्यो नही निभा सकते ?
वैसे राजनीति की खासियत है इस उम्र मे भी चरित्र नेता के रोल के लिए भी संवैधानिक पद बने हुए हैं । जिसका सभी दल अपने राजनीतिक हितों के लिए करती है । जिसका आरोप प्रत्यारोप आजादी के बाद से देश ने देखा है । इस पर लिखने के लिए काफी है । पर बस इतना ही डा . चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ
(डॉ चंद्रकांत रामचंद्र वाघ पेशे से आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं, यह लेखक के निजी विचार हैं)



