
सोनू केदार बलरामपुर – जिले में 25000 के इनामी नक्सली ने किया आत्मसमर्पण किया है। एसपी रामकृष्ण साहू के समक्ष इनामी नक्सली ने आत्मसमर्पण किया है। बताया जा रहा है कि साल 2004 इनामी नक्सली सक्रिय था। आत्मसमर्पित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी का सदस्य था जिसके खिलाफ जिले चलगली और बलरामपुर थाना क्षेत्र में 7 प्रकरण दर्ज है। वहीं वर्ष 2005 में चलगली थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी अजितेश सिंह पर हमला किया था। समर्पण करने वाले नक्सली का नाम सीताराम घसिया बताया जा रहा है।
नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान से प्रेरित होकर आज बलरामपुर जिले में एक नक्सली कमांडर ने एसपी के सामने आत्मसमर्पण किया। नक्सली कमांडर का नाम सीताराम घसिया है और वह पिछले 17 सालों से नक्सली ग्रुप में सक्रिय था और अब तक कई वारदातों को अंजाम भी दे चुका था। नक्सली कमांडर के खिलाफ 7 वारंट जारी हुए थे वही उसके खिलाफ पुलिस ने ₹25000 का इनाम भी घोषित किया था। पुलिस की टीम लगातार इस नक्सली की सर्चिंग में जुटी हुई थी लेकिन सरकार की योजनाओं से प्रेरित होकर नक्सली कमांडर में खुद आत्मसमर्पण किया और समाज के मुख्यधारा से जुड़ने के लिए पहल किया।
रामकृष्ण साहू ने इस आत्मसमर्पण नक्सली कमांडर के बारे में पूरी जानकारी दी और बताया कि सीताराम घसिया चलगली थाना क्षेत्र के ग्राम बादा का रहने वाला है और साल 2003 में उसने एमसीसी स्टेट कमेटी सदस्य भीम कोडाकू और एरिया कमांडर सागर से मुलाकात कर नक्सली बना था और बाद में उसे चलगली क्षेत्र का एरिया कमांडर भी बना दिया गया था। सीताराम घसीया की पत्नी देवंती भी नक्सली थी जिसे सनावल पुलिस ने गिरफ्तार किया था और अभी वह समाज के मुख्यधारा से जुड़ कर ग्राम दहेज वार में निवास कर रही है।
नक्सली कमांडर सीताराम घसिया ने साल 2006 में थाना प्रभारी अजितेश सिंह के ऊपर आईडी ब्लास्ट करते हुए अंधाधुंध फायरिंग की थी जिससे थाना प्रभारी की पीठ पर गोली भी लगी थी इस मामले के बाद से फरार चल रहा था और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। पुलिस से बचकर नक्सली कमांडर झारखंड बिहार नेपाल व चाइना के साथ ही असम की तरफ भाग गया था और आज उसने एसपी के सामने आत्मसमर्पण कर समाज के मुख्यधारा की जुड़ने की बात कही है।




