गीदम. दंतेवाड़ा जिले के विकासखंड गीदम मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम नागफनी में नाग देवता का प्राचीन मंदिर है। कहा जाता है कि नाग देवता के नाम पर ही इस गांव का नाम नागफनी पड़ा। नाग पंचमी के दिन मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की जाती है और विशाल मेला भरता है। मंदिर के पुजारी प्रमोद अटामी ने बताया कि यह मंदिर नागवंशी राजाओं द्वारा लगभग आठवीं सदी में स्थापित किया गया था। वर्तमान में स्थानीय ग्रामीणों ने इसे बड़े ही जतन से सहेज कर रखा है। हर वर्ष नाग पंचमी के अवसर पर नाग मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की जाती है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस दिन लगने वाले मेले में लगभग 10 गांव की माता पहुंचती है।
यह संभवत: बस्तर संभाग का इकलौता प्राचीन नाग मंदिर हैयुद्ध में जाने के पूर्व टेकते थे मत्था नाग मंदिर का प्रवेश द्वार पश्चिम दिशा की ओर है। प्रवेश द्वार के बाईं ओर नरसिंह भगवान की मूर्ति एवं दाईं ओर नृत्यांगना की मूर्ति स्थापित है। मंदिर के गर्भगृह में नाग नागिन की व गणेश भगवान की मूर्ति स्थापित है। पौराणिक मान्यता है कि नागवंशी राजा जब भी युद्ध के लिए जाते थे। वे अपना मस्तक इस मंदिर में टेक कर व पूजा अर्चना कर युद्ध के लिए जाते थे। आठवीं सदी पुरानी मूर्ति आज भी सुरक्षित पुजारी ने बताया कि एक किदवंती है कि प्राचीन काल में मुगलों के शासन काल के दौरान जब मंदिरों को तोड़ा जा रहा था।
तब ग्रामीणों ने मूर्तियों को बचाने के लिए मंदिरों की मूर्तियों को जमीन के नीचे छिपा दिया था। जिसके कारण बस्तर अंचल की लगभग सभी मूर्तियां आज भी सुरक्षित है। इसी कारण नागफनी के मंदिर की आठवीं सदी पुरानी मूर्ति आज भी सुरक्षित है। इन सब घटनाओं के बाद अस्सी के दशक में फिर से इस मंदिर में पूजा अर्चना शुरू हुई। इस वर्ष भी 5 कुंडीय गायत्री यज्ञ के साथ विशेष पूजा अर्चना की जाएगी



