
जयकिशन साहू नगरी – सिहावा विधान सभा क्षेत्र मे सडको की स्थिती दयनीय हो गई चाहे मुख्य मार्ग हो या प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना हो या वन मार्ग ग्रामीणो द्वारा क्षेत्र की सडम निर्माण की हमेशा माग की जा रही जहा रिपेरिग के बजाय विभाग द्वारा सडको मे गिट्टी का चूरण व डस्ट डालकर सडको की लिपा पोती की जा रही।
सरकार विकास की लाख दावे करे मगर सडको की स्थिती को देखते हुए सरकार की दावे की पोल खुल गई आज साकरा से काकेर बेलर मुख्यमार्ग जो की विधायक गृह ग्राम जाने का प्रमुख मार्ग है जहा हमेशा से आसपास के ग्रामीणो द्वारा सडक निर्माण की माग की जा रही यह मार्ग सिगल सडक है जहा हमेशा पटरी मे गढ्ढे हो या सडको पर बडी बडी गढ्ढे इस मार्ग मे रोजाना सैकडो वाहनो का आवाजाही होता है साथ ही स्कूली छात्र छात्राएं भी इसी सडक से सफर करते है। आये दिन दूपहिया वाहन चालक सायकल सवार गिर कर चोटिल होते है और सडक निर्माण विभाग सडको के रिपेरिग के बजाये डस्ट डालकर मामले की खानापूर्ती कर रही है। यही कारण है की सडक बनने के बजाये और खराब हो रही है, ग्रामीणो ने यहा नये सडक निर्माण की माग की है।
यहां समझें क्षेत्रवार हालात
सिहावा से नगरी मुख्यमार्ग मे सडको पर बडे बडे गढ्ढे उभर आये जहा वाहन चालको को हमेशा जान जोखिम मे डालकर वाहन चलाना पडता है।
नगरी हरदी भाटा बाईपास की स्थिती भी काफी खस्ता हाल है यहा तो दोपहिया वाहन चलाने मे ही पसीना छूट जाता है मालवाहक के लिये बनी सडक मे मालवाहक गाडी चालक भी इस मार्ग पर वाहन चलाना पसंद नही करते यही कारण है रात मे अधिकतर गाडिया नगरी शहर से गुजरती है।
दुगली से मेघा मार्ग की स्थिती तो और भी दयनीय है यहा तो सडको मे गढ्ढे है या गढ्ढो पर सडक पता ही नही चलता अगर मेघा के पास तो दो पहिया या छोटी चारपहिया वाहन के लिये साईड ही नही बचता बडी मुशेकील से जगह देखकर बडी गाडी छोटी गाडी को साईड दे पाता है।
वनाचल की बात करे तो रिजर्व फारेस्ट मे तो सडक ही नही है यहा ग्रामीण वन मार्ग मे सफर करते है जहा सिर्फ गढ्ढे ही गढ्ढे नजर आते है बारिश का चार माह रिसगाव ,खल्लारी ,करही ,चमेदा ,जोरातरई टापू बन जाता है नदी मे पूल नही सडक नही ग्रामीण गरियाबंद जिला हो कर वापस धमतरी जिला ब्लाक मुख्यालय आते है
ब्लाक मुख्यालय से महज 15 से 20 की मी की दूरी पर बसा लखनपुरी ,भीषमपुरी ,अमलीडीही ,पोडागाव के ग्रामीण सदियो से प्रधान मंत्री ग्राम सडक की माग करते आ रहे इनकी मागे पूरी नही होने से यहा स्कूल कालेज व आम ग्रामीणो को बारिश का चार माह भारी पड जाता है अच्छी बारिश होने पर छात्र छात्राऐ तो स्कूल भी नही जा पाते



