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क्यों पहननी चाहिए कछुवे वाली अंगूठी, जानिए क्या कहता है वास्तु

वास्तुशास्त्र में कछुआ को सकारात्मक उर्जा का प्रतीक माना गया है। ऐसा माना जाता है कि कछुए वाली अंगूठी पहनने से शरीर में सकारात्मक उर्जा का संचार होता है। इसके अलावा कछुए वाली अंगूठे को उन्नति का प्रतीक भी माना जाता है। इसलिए ऐसा माना जाता है कि इस अंगूठी को पहनने से उन्नति के मार्ग भी खुलते हैं।

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वास्तुशास्त्र में ऐसा उल्लेख मिलता है कि कछुआ भगवान विष्णु का ही अवतार है। समुद्र मंथन के समय देवी लक्ष्मी के साथ कछुआ का भी प्रकट हुआ था, इसलिए कछुआ देवी लक्ष्मी का भी प्रिय माना जाता है। कछुए वाली अंगूठी पहनने से व्यक्ति में आत्मविश्वास और उर्जा का संचार अत्यधिक होता है। धन लाभ के लिए भी कछुए वाली अंगूठी पहनना अच्छा माना गया है। ऐसी मान्यता है कि कछुए वाली अंगूठी पहनने से माता लक्ष्मी प्रसन्न रहती हैं।

कब पहनना है शुभ

कछुए वाली अंगूठी पहनने से पहले इसे शुक्रवार को ही चांदी के धातु में बनवाना या खरीदना चाहिए। इस अंगूठी को पहनने के लिए शुभ दिन शुक्रवार माना गया है। शुक्रवार के दिन इस अंगूठी को गंगाजल से अभिषिक्त करना चाहिए। इसके अलावे इस अंगूठी को पहनने से पूर्व लक्ष्मी के बीज मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। यदि संभव हो धारण करने के क्रम में भी लक्ष्मी के मंत्र का जाप कर सकते हैं। कछुए वाली अंगूठी को धारण करने के बाद इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि कछुए का सिर वाला हिस्सा पहनने वाले की ओर होना चाहिए।

कछुए से जुडी मान्यता

कछुए के चार पैर होते हैं जेसे अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष का प्रतीक माना गया है।
कछुए का मुख ऊपर की ओर होता है इसलिए उसे स्वर्ग ले जाने वाला द्धार माना जाता है।
कछुए की पुंछ ऊपर से नीचे की तरफ है इसलिए उसे धरती का प्रवेश द्धार माना जाता है।
कछुए की पीठ को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड माना गया है और उसकी नौ धारियां ब्रह्माण्ड को 9 खण्डों में बांटती है।
कछुए का रंग प्रकर्ति, उम्र सबसे अधिक और शांत जीव होने के कारण उसे मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है।

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