लाइफस्टाइल

क्या आप जानतें हैं ? एक ऐसा भी देश हैं जहाँ इंसानो को उनके नाम से नहीं बल्कि अलग अलग धुनों से पुकारा जाता हैं देखें विडियो…

भारत में तरह-तरह की परंपराएं और संस्कृतियां हैं. सबके बारे में जानने के लिए एक जीवन भी कम पड़ सकता है. ऐसी ही एक अनूठी संस्कृति मेघालय के एक गांव कोंगथोंग में मौजूद है. इस गांव की एक बहुत ही दिलचस्प बात यह है कि यहां के लोग गा कर आपस में बात करते हैं और इस गांव के हर निवासी का नाम एक धुन है

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आपको बता दें कि कोंगथोंग को व्हिसलिंग विलेज के रूप में जाना जाता है. कोंगथोंग में सुंदर पहाड़ों, झरनों और देवदार के पेड़ों से घिरी घाटी की प्राकृतिक सुंदरता के अलावा, जो चीज कोंगथोंग के बारे में अधिक आकर्षित करती है वह है इसकी आकर्षक संस्कृति. कहा जाता है कि इस गांव में जब बच्चे का जन्म होता है तो मां के दिल से जो भी धुन निकलती है वह बच्चे के नाम हो जाती है और यह प्रथा वाकई दिल को छू लेने वाली है. गांव में बातें कम और धुनें अधिक सुनाई देती हैं. यहां लोगों के आम नहीं होते बल्कि उन्हें पुकारने के लिए धुन का इस्तेमाल किया जाता है।

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लोगों से मिली जानकारी के अनुसार कोंगथोंग एक लोकप्रिय सिंगिंग विलेज के रूप में जाना जाता है क्योंकि यहां ‘जिंगरवाई इवाबेई’ एक लोरी है जिसे यहां के लोग एक दूसरे को बुलाने के लिए बनाते हैं. जानकारी के मुताबिक गांव में, पुराने समय से एक मान्यता चली आ रही है, जिसके हिसाब से जंगल में जाने वाले लोग एक-दूसरे को नामों से पुकारते हैं, तो एक सर्वनाशकारी प्रेत या आत्मा उन्हें जान जाती है और उनके परिवारों को नुकसान पहुंचाने के लिए उनके घरों तक उनका पीछा करती है. आपको इस बात की जानकारी दे दें कि व्हिस्लिंग विलेज में ठहरने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक कोंगथोंग ट्रैवलर्स नेस्ट है, जो कि एक सुंदर बांस की झोपड़ी है. यहां रहने वाले लोग आसानी से आपका दिल जीत लेंगे. आपको बता दें कि आप इस बेहद ही सुंदर गांव में शिलांग से सड़क मार्ग से लगभग 2 घंटे का सफर तय कर आ सकते हैं।

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