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सबसे बड़ा रोग – क्या कहेंगे लोग, मानसिक रोग को छुपाएँ नही, बल्कि तत्काल उसका ईलाज करायें

फिल्मी कलाकार सुशांत सिंह के आत्म हत्या के बाद अखबारों तथा इलेक्ट्रानिक मीडिया ने जिस तरीके से खबर दिखाई उसे देखने के बाद अचानक आत्म हत्या करने वालों का प्रतिशत बढ़ा। मानसिक बीमारी के बारे में परिवार या व्यक्ति रूचि नही लेता, शायद मानसिक बीमारी का ईलाज करने में या चर्चा करने में अपने को हीन समझता है। और इस पर चर्चा करना या इसका ईलाज कराने से कतराता है।

जिस प्रकार से अन्य बीमारी जैसे कैन्सर, हृदयरोग, मधुमय, ब्लड प्रेशर, टीवी. होने की जानकारी या उसके लक्षण दिखने पर सारे काम छोड़कर तत्काल डाॅक्टर के पास पहुँचता है और तुरन्त उसका ईलाज चालू करवा देता है। उसी प्रकार बिना किसी भय या शर्म के मानसिक रोग की जानकारी लगते ही ईलाज शुरू करा देना चाहिए।

पूरे शरीर का संचालन दिमाग से ही होता है। दिमांग पहले देखता है बाद में आँखे, स्वभाविक सी बात है जैसे व्यक्ति के शरीर के अन्य अंग खराब हो सकते है, मस्तिष्क के अन्दर मस्तिष्क के अंगों में कमी होने के कारण मानसिक कई प्रकार की बीमारी हो सकती है, इसे समझना, इस समय परिवार के लोगों को अत्यंत आवश्यक है। मानसिक बीमारी के कई प्रकार है और यह बीमारी ठीक हो सकती है यह विश्वास दिलाना परिवार के सदस्यों की जिम्मेदारी है।

बाॅलीवुड के सुशांत सिंह के आत्म हत्या करने के पश्चात्, सोशल मीडिया पर जिस तरीके की टिप्पणी पढ़ने को मिल रही है वह समाज के लिए घातक है। मैने कुछ टिप्पणीयाँ पढ़ी जैसे सुशांत सिंह ने सफलता की सीढ़ी पर चढ़कर शिखर का स्थान प्राप्त कर लिया था, और इस कारण वे सब लोगों से कट गये थे, कुछ ने लिखा दोस्तों मित्रों से मिलते रहो, कुछ ने लिखा परिवार समाज के साथ जुड़े रहो, वर्ना अवसाद के शिकार हो जाओगे।

अखबार, इलेक्ट्रानिक मीडिया या सोशल मीडिया ने यह संदेश नही दिया कि अवसाद का ईलाज होता है, और मानसिक रोगी ठीक हो सकते है। मानसिक रोग छुपाएँ नही बल्कि उसका ईलाज करायें।

रोजगार छिन जाने, रोजगार ना मिलने के कारण नवजवान चिंतित है, अवसाद से पीड़ित व्यक्ति के साथ कैसा व्यवहार किया जावे तथा उनके साथ किन शब्दों को उपयोग नही करना चाहिए यह जानकारी चिकित्सक से जरूर चर्चा करें।

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