स्वतंत्रता दिवस की ये शानदार कविताएं सुनाइए लोगों को
प्यारा प्यारा मेरा देश,
सबसे न्यारा मेरा देश।
दुनिया जिस पर गर्व करे,
ऐसा सितारा मेरा देश।
चांदी सोना मेरा देश,
सफ़ल सलोना मेरा देश।
गंगा जमुना की माला का,
फूलोँ वाला मेरा देश।
आगे जाए मेरा देश,
नित नए मुस्काएं मेरा देश।
इतिहासों में बढ़ चढ़ कर,
नाम लिखायें मेरा देश।
स्वर्ग या तोरण पथ से बेहतर
मैं तुम्हें प्यार करता हूं, ओ मेरे भारत
और मैं उन सभी को प्यार करुंगा
मेरे सभी भाई जो राष्ट्र में रहते हैं
ईश्वर ने पृथ्वी बनाई;
मनुष्य ने देशों की सीमाएं बनाई
और तरह तरह की सुंदर सीमा रेखाएं खींचीं
परन्तु अप्राप्त सीमाहीन प्रेम
मैं अपने भारत देश के लिए रखता हूं
इसे दुनिया में फैलाना है
धर्मों की माँ, कमल, पवित्र सुंदरता और मनीषी
उनके विशाल द्वार खुले हैं
वे सभी आयु के ईश्वर के सच्चे पुत्रों का स्वागत करते हैं
जहां गंगा, काष्ठ, हिमालय की गुफाएं और
मनुष्यों के सपने में रहने वाले भगवान
मैं खोखला हूं; मेरे शरीर ने उस तृण भूमि को छुआ है
भारत देश हमारा प्यारा।
सारे विश्व में हैं न्यारा।
अलग अलग हैं यहाँ रूप रंग।
पर सभी एक सुर में गाते।
झेंडा ऊँचा रहे हमारा।
हर परदेश की अलग जुबान।
पर मिठास की उनमे शान।
अनेकता में एकता पिरोकर।
सबने मिल जुल कर देश संवारा।
लगा रहा हैं भारत सारा।
‘हम सब एक हैं’ का नारा।
यारा प्यारा मेरा देश
सजा सवार मेरा देश’
दुनिया जिस पर गर्व करे
नयन सितारा मेरा देश
चांदी सोना मेरा देश
सफल सलोना मेरा देश
सुख का कोना मेरा देश
फूलों वाला मेरा देश
झूलों वाला मेरा देश
गंगा यमुना की माला का मेरा देश
फूलों वाला मेरा देश
आगे जाए मेरा देश
नित नए मुस्कुराये मेरा देश
इतिहासों में नाम लिखाया मेरा देश
यारा प्यारा मेरा देश
सजा संवारा मेरा देश
क्या पढ़ते हो किताबों में
आओ मैं तुम्हे बताती हूँ,
15 अगस्त की असली परिभाषा
आज अच्छे से समझती हूँ।
एक दौर था जब भारत को,
सोने की चिड़िया कहते थे।
कैद कर लिया इस चिड़िये को,
वो शिकारी अंग्रेज कहलाते थे।
कुतर-कुतर कर सारे पंख,
अधमरा कर छोड़ा था।
सांसें चल रही थी बस,
ताकत से अब रिश्ता पुराना था।
कहते हैं कि हिम्मत से बढ़ कर,
दुनिया में और कुछ नहीं होता।
कतरा-कतरा समेट कर,
फिर उठ खड़ी हुई वो चिड़िया।
बिखर गए थे सारे पंख,
तो बिन पंखो के उड़ना सीख लिया।
परिस्थिति चाहे जैसी भी थी दोस्तों,
उसने लड़ना सीख लिया।
लड़ती रही अंतिम सांस तक,
और सफलता उसके हाथ लगी।
आज़ादी की थी चाह मन में,
और वो आज़ादी के घर लौट गयी।
आज उस चिड़िया को हम,
गर्व से भारत बुलाते हैं।
और सीना गद-गद हो जाता,
जब हम भारतीय कहलाते हैं।
आज़ादी का यह पर्व दोस्तों,
आओ मिल कर मनाते हैं,
चाहे रहें हम अमेरिका या लंदन
भारत को आगे बढ़ाते हैं,
भारत के गुण गाते हैं और 15 अगस्त मनाते हैं।




