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मरवाही उपचुनाव – उपचुनाव में जोगी परिवार वर्चस्व की लडाई लड़ रहा है

मरवाही विधानसभा का चुनाव अपने उरुज पर है ऐसे समय में जोगी परिवार के जाती प्रमाण पत्र के आधार पर उनका नामांकन ख़ारिज होना अब तक एक तरफा चुनाव परिणाम की ओर इशारा कर रहा है । वही ये उप चुनाव अलग तरह के राजनैतिक बदलाव के संकेत भी दे रहा है! वर्षों से मरवाही क्षेत्र अजीत जोगी के वर्चस्व और जनाधार का क्षेत्र जाना जाता रहा है, पिछली भाजपा की सरकार ने ही जोगी के आदिवासी होने को न्यायालय मे चैलेंज किया था और उनके जाती प्रमाण पत्र को फ़र्जी बताया था, फिर राजनैतिक ,परिस्थितियाँ बदली और स्व जोगी जी ने अपनी राजनिति तत्कालीन रमन सरकार से अपनी ट्विनिंग बैठा लिया था, सो जाती का मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, अब मरवाही क्षेत्र में उप चुनाव होने जा रहे है ,ऐसे समय जोगी परिवार का आदिवासी का जाती प्रमाण पत्र का जिन्न फिर बाहर निकल गया है। इसमें एक बात यहाँ कहना जरूरी है की आम आदमी अपना जाती प्रमाण पत्र आसानी से नही बनवा पाता लेकिन ये राजनिति करने वाले नेताओ के लिए सब आसान हो जाता हैं, जोगी परिवार आरक्षित सीट से भी चुनाव लड़ते रहे , और समान्य सीट से भी !

याने इनके लिए इनकी पार्टी में कोई और चुनाव लड़ने योगय नहीं है !इन विपरीत परिस्थितियाँ मे किसी और को भी तो मौका दिया जा सकता था लेकिन इन्होमे ये मौका भी गवा दिया है। और वही अब मरवाही उपचुनाव से पहले जाति प्रमाण-पत्र के विवाद ने सियासी रंग ले लिया है। जबकि ये बेहतर जानते थे की ये स्थिती आने वाली है! अमित जोगी ने घोषणा की है। अब हम न्याय यात्रा लेके जन जन तक जायेंगे। मरवाही के हर गांव मे हर गली मे जनता कांग्रेस की न्याय यात्रा निकलेगी जो वोट के लिए नहीं पर न्याय के लिए होगी। जबकि जोगी कांग्रेस को कोई भी उम्मीदवार इस उप चुनाव में उतरना था ! तब स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता था।

अमित जोगी कहते है की मरवाही अजित जोगी और उनके परिवार के साथ हो रहे इस अन्याय के खिलाफ न्याय जरूर करेगा अगर न्याय ही चाहिए था तो उनकी पार्टी चुनाव में भाग लेना था ,वे कहते है की हमारे साथ अन्याय हुआ है, अब मरवाही की जनता को बदला लेना है। याने सीधे सीधे भाजपा को लाभ पहुंचना है इस बारे में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भी कथन है कि भाजपा ने नकली आदिवासी के मुद्दे पर चुनाव लड़ा और सत्ता में आए। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जाति मामले में पूरे 15 साल लगा दिए और उसी के दम पर सत्ता हासिल की। जोगी की जाति के संबंध में उनकी ही शिकायत थी। सभी जानते हैं कि किस प्रकार से उनकी जुगलबंदी रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो वो 15 साल में नहीं कर पाए हमने 18 महीने में कर दिया। मुख्यमंत्री भूपेश ने कहा कि अनुसूचित जनजाति के नाम पर बहुत से लोग फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर नौकरी करते हैं। शिकायत होती है तो स्टे लेकर सालों तक फायदा उठाते रहते हैं। अब फैसला आया तो भाजपा को इसका स्वागत करना चाहिए। वैसे इस चुनाव मे अमित जोगी की साख दांव पर लगी हुई है।

उनके कंधे पर अपने पिता के विरासत को बचाने का जिम्मा है। इस बात से वह भली भांति वाकिफ हैं। जोगी परिवार की इस वर्चस्व की लडाई को नामांकन रद्द होने तक सीमित कर नही देखा जा सकता इसका लाभ किसे होगा यह महत्व पूर्ण है। इस स्थिति मे अमित जोगी के राजनीतिक भविष्य पर प्रशन चिन्ह लगा हुआ है। अब देखना ये है की आगे क्या होने वाला हैं अमित जोगी क्या भाजपा के साथ देंगे ये उप चुनाव उनका राजनिति भविष्य तय करेगा। इसलिए अमित जोगी और पार्टी के वरिष्ठ नेता इस चुनाव को काफी गंभीरता से ले रहे हैं , ऐसी स्थिति में क्या अमित जोगी मरवाही में भावनात्मक कार्ड खेलेंगे ? मरवाही क्षेत्र में जकांछ के पास स्थानीय कार्यकर्ता अधिक हैं, और आदिवासी समाज के मुख्य लोगों को अपने पाले मे रखे हुए है जिनकी अपने समाज में अच्छी पकड़ है। ये लोग जोगी जी के पुराने प्रचारक है जो कांग्रेस को भीतरी भागो में अच्छा खासा नुकसान पहुँचा सकते है,क्योंकि जिला बनाने की बाते शहरी झेत्र तक सीमित रह सकती है, कांग्रेस के खिलाफ इनका मौखिक प्रचार अभियान करने की तैयारी इनके द्वारा किया जा सकता हैं ।

जोगी के निधन और जाती प्रमाण पत्र को मुद्दा बना कर सहानुभूति लेने की पूरी कोशिश की जायेगी क्योंकि जोगी जी के देहांत को ज्यादा समय नहीं हुए हैं। क्षेत्र की जनता उनको आसानी से भूला नहीं पाई है। कांग्रेस विकास कार्य और जिला बनाने के दम पर तो भाजपा कांग्रेस सरकार की विफलता को लेकर जनता के सामने जा रही है लेकिन अमित जोगी अगर भाजपा के साथ चले जाते है और जोगी कांग्रेस इस चुनाव को भावनात्मक रूप से प्रचारित करते है तो ये उप चुनाव के परिणाम चौकाने वाले हो सकते हैं।

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