inh24छत्तीसगढ़राशिफल - अध्यात्म

Guru Purnima 2021 : जानें आषाढ़ पूर्णिमा कब हैं, शुभ मुहूर्त, और महत्त्व

आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि को आषाढ़ पूर्णिमा के साथ गुरु पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस बार यह शुभ तिथि 24 जुलाई दिन शनिवार को है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत काल भी रहेगा। गुरु पूर्णिमा को भारत में बहुत उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। मनुष्य रूप में जन्म लेकर देवताओं ने भी गुरु के चरण दबाए हैं और उनसे ज्ञान प्राप्त किया है। साथ ही इस दिन महाभारत के रचयिता वेदव्यास का भी जन्म दिवस है ।

इसलिए इस तिथि को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। वेद व्यासजी को प्रथम गुरु की उपाधि प्राप्त है क्योंकि मानव जाति को चारों वेदों का ज्ञान दिया था। इस दिन के बाद से आषाढ़ मास समाप्त हो जाता है और सावन मास का प्रारंभ होता है।

जानें आषाढ़ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त;

आषाढ़ पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 23 जुलाई दिन शुक्रवार को सुबह 10 बजकर 34 मिनट से

आषाढ़ पूर्णिमा तिथि समापन – 24 जुलाई दिन शनिवार को सुबह 08 बजकर 06 मिनट पर

जानें आषाढ़ पूर्णिमा का महत्व

आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को आषाढ़ी पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा कहा जाता है। हिंदू धर्म में वैसे तो सभी पूर्णिमा का अपना विशेष महत्व है लेकिन आषाढ़ पूर्णिमा का अपना एक अलग स्थान है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है और जप-तप व दान के लिए बहुत महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है।

वहीं आषाढ़ पूर्णिमा के दिन गुरु पूजन भी किया जाता है। गुरु मंत्र प्राप्त करने के लिए भी यह दिन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन आप जिसे भी गुरु मानते हैं, उसके प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है और गुरु की पूजा की जाती है। क्योंकि उनके ज्ञान के प्रकाश से जीवन का अंधकार दूर होता है और गुरु द्वारा ईश्वर की प्राप्ति होती है। गुरु का ज्ञान ही जीवन के हर मार्ग को आलोकित करने में सक्षम होता है। प्राचीन काल से लेकर आज तक गुरु-शिष्य की परंपरा चली आ रही है। इस दिन केवल गुरु ही नहीं बल्कि परिवार के सभी बड़े सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए और उनको गुरु तुल्य समझकर आदर करना चाहिए।

गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि;

बता भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से ऊपर है। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु के चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लें। इसके बाद गुरु को श्रद्धा और क्षमतानुसार गुरु दक्षिणा या उपहार भेंट स्वरूप दें। इस दिन गुरु का आभार व्यक्त करने के लिए वैसे ही तैयारी करें जैसे भगवान की पूजा के लिए करते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की साफ-सफाई व स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और फिर गुरु को टीका लगाकर प्रसाद खिलाएं, आशीर्वाद लें और फिर भेंट दें।

Related Articles

Back to top button