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संपादक की कलम से – आसान नहीं है ये एक जटिल लडाई है.. पर तुम जीतो संजय.. शुभकामना

बूजूर्ग महिला को माइल्ड संक्रमण था। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने रामकृष्ण अस्पताल, केंद्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है

कोविड संक्रमित बूजूर्ग महिला के ईलाज के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से निर्धारित दर के हिसाब से 68 हज़ार रुपए नीजि अस्पताल को लेने थे लेकिन अस्पताल ने चार लाख से उपर के बिल की वसुली कर ली। जबकि बूजूर्ग महिला को माइल्ड संक्रमण था। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने रामकृष्ण अस्पताल, केंद्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।

याचिका के अनुसार मामला अंबिकापुर का है, जहां की श्रीमती सुमन अंबस्ट को 22 सितंबर को रामकृष्ण अस्पताल में दाखिल कराया गया था। उन्हें कोरोना का माइल्ड संक्रमण था, केंद्र और राज्य की गाईडलाईन के अनुसार प्रतिदिन की अधिकतम फ़ीस 6200 रुपए होती है, श्रीमती सुमन अंबस्ट की उपचार के दौरान बारहवें दिन मौत हो गई। याचिका में आरोप है कि रामकृष्ण अस्पताल ने निर्धारित राशि के अतिरिक्त कई गुना चार्ज किया और चार लाख से अधिक की राशि बिल के बतौर चार्ज करते हुए मृत मरीज के परिजन से लिए।

याचिका अंबिकापुर के वकील संजय अंबस्ट ने लगाई है, स्वर्गीया सुमन अंबस्ट उनकी माँ हैं। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने रामकृष्ण अस्पताल केंद्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।

अधिवक्ता संजय अंबस्ट की यह लड़ाई जिन मुद्दों पर केंद्रित है वह दिलचस्प है। संजय यह चाहते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार की यह जवाबदेही थी कि वे यह सुनिश्चित करते कि नागरिक उनकी दी गई व्यवस्था/सुविधा का लाभ हासिल कर पा रहा है या नही.. राज्य और केंद्र सरकार ने यह निगरानी नही रखी, और यदि कोई व्यवस्था नोडल अधिकारी के रुप में होना बताई भी गई तो वह केवल अभिलेखों में थी,इसलिए राज्य और केंद्र सरकार जवाबदेह है और वे इससे नही बच सकते।

अधिवक्ता संजय अंबस्ट के लिए मसला केवल उनसे फ़ीस के रुप में ली गई कई गुनी रक़म की वापसी का नहीं है, वे चाहते हैं कि सभी मरीज़ों के फ़ीस की जाँच हो और सबसे ली गई अतिरिक्त फ़ीस वापस ली जाए।याचिका में यह माँग भी है कि जवाबदेहों की पहचान की जाए और उन सबके विरुद्ध विधिसम्मत कार्यवाही हो, याने FIR हो।

आसान सी दिखती यह एक जटिल लड़ाई है, सर्वशक्तिमान सरकार और बेहद प्रभावी दखल और वजूद रखने वाले चिकित्सा संस्थान से लड़ना और महँगी और थका देने वाली न्यायिक प्रणाली में खुद के आरोपों को सही साबित करते हुए जीत दर्ज करना क़तई आसान नहीं है। लेकिन माँ की मौत को हत्या मानने वाला यह बेटा भी पूरी जिद पर है।

हम आप उसे शुभकामनाएँ दे सकते हैं .. आपका मैं नहीं जानता.. पर मेरी ओर से उसे जीत की शुभकामना जरुर है।चाहूँगा आप भी दें ..

(याज्ञवल्‍क्‍य वशिष्ठ वरिष्ठ पत्रकार हैं एवं उनके लेख विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं)

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