
दंतेवाड़ा । में बीती रात दंतेवाड़ा के सरकारी जिला अस्पताल में एक दिव्यांग गर्भवती को समुचित ईलाज नहीं मिलने एवं परिजनों से महिला डॉक्टर एवं स्टाफ द्वारा अमर्यादित व्यवहार करने का मामला प्रकाश में आया है। पीडि़त ने आरोप लगाया है कि रात में महिला डॉक्टर डयूटी से नदारत थी बुलाने पर भी कई घंटे की देरी से अस्पताल पहूंची। अस्पताल आने के बाद भी डॉक्टर ने गर्भवती को नहीं देखा और उल्टा परिजनों से बहसबाजी करने लगी और थोड़ी देर बाद ही परिजनों को रेफर कागज थमाते हुए बाहर का रास्ता दिखा दिया। एक दिव्यांग गर्भवती के साथ इस तरह का शर्मनाक व्यवहार देख हर कोई हतप्रभ है। अब परिजन इस मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों तक करने की बात कह रहे हैं।
यह पूरी घटना को बयां करते हुए दिव्यांग गर्भवती महिला के पति राजकुमार जैन ने कहा कि वे गीदम के रहने वाले हैं। हम पति पत्नि दोनों अस्थि बाधित याने दिव्यांग हैं। मेरी पत्नि श्रीमती चेतना जैन की यह दूसरी डिलवरी थी। पहला बच्चा भी आपरेशन से हुआ था। पत्नि चेतना दूसरी मर्तबा गर्भवती हुई है। डॉक्टर ने 10 जुलाई का समय दिया था। वहीं एक दिन पूर्व ही बीती रात उसे अचानक दर्द उठने लगा। जिसके बाद उसे शुक्रवार रात करीब 11 बजे जिला अस्पताल लाया गया। रात में महिला डॉक्टर निधि मेश्राम की डयूटी थी पर इत्तेफाक से वो अस्पताल में मौजूद नहीं थी।
बता दें की अस्पताल के नर्स ने पत्नि चेतना की कंडीशन को देख भर्ती तो कर लिया लेकिन डॉक्टर को बुलाने को लेकर अजीबो गरीब तर्क देने लगी कि अभी वो नहीं आएंगी। आएंगी भी तो समय लग जाएगा। आप लोगों को इंतजार करना होगा। गर्भवती दिव्यांग महिला के पति राजकुमार जैन ने बताया कि डॉक्टर को फोन करने के बाद भी वे ढाई से 3 घंटे विलंब से यानी रात्रि करीब 2.30 बजे अस्पताल पहुंची और गर्भवती को देखने के बाद कहने लगी कि अभी रात में इसका ऑपरेशन संभव नहीं है आप लोग रात में इसे यहां क्यों लेकर आए हैं।
इसी बीच ऐसा कहते हुए डॉक्टर परिजनों से बहसबाजी करने लगी। ईधर गर्भवती की कंडीशन को देखते हुए रात में ही आपरेशन की जिद करने लगे परंतु डॉक्टर निधि ने एक न सुनी और फौरन रेफर पर्ची बनाकर परिजनों को हस्ताक्षर करने दबाव डालने लगी। परिजन कहते रहे कि जब आपरेशन ही नहीं किया तो रेफर पर्ची में हस्ताक्षर हम क्यूं करें इस बात को लेकर भी काफी देर तक डॉक्टर व परिजन के बीच गरमा गरम बहसबाजी होती रही। ईधर गर्भवती का कंडीशन लगातार बिगड़ता जा रहा था दर्द भी बढ़ रहा था लेकिन इसकी चिंता डॉक्टर मोहतर्मा को तनिक भी नहीं थी।
जानकारी के मुताबिक़ एक महिला उपर से डॉक्टर होने के बाद भी महिला डॉक्टर ने संयम एवं महिला डॉक्टर होने का फर्ज न निभाते हुए किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना होने से अपने आपको बचाए रखने के लिए जबरन परिजनों से रेफर कागज में हस्ताक्षर कर लिया और भोर में 3 बजे गर्भवती महिला को बाहर का रास्ता दिखा दिया। जिसके बाद गर्भवती को अस्पताल के ही एम्बुलेंस में लिटाकर डिमरापाल अस्पताल ले जाया गया। परिजनों के मुताबिक रेफर के वक्त भी एम्बुलेंस में गर्भवती के साथ कोई डॉक्टर या नर्स नहीं गई केवल एक अटेंडर मौजूद था।
डिमरापाल अस्पताल में आज सुबह 6 बजे महिला का सफल आपरेशन किया गया। फिलहाल जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ्य हैं। अब सवाल यह कि लाखों रूपए के पैकेज पर सरकारी अस्पताल में तैनात डॉक्टर क्या केवल लाखों की सैलरी उठाने के लिए अस्पताल आते हैं? डयूटी के वक्त रात में डॉक्टर अस्पताल में क्यों नहीं रहते? ऑन काल सूचना देने के बाद भी घर से अस्पताल तक पहुंचने में घंटों की देरी क्यों की जाती है? रात में डयूटी में तैनात डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की औचक निरीक्षण बीच बीच में अस्पताल के सिविल सर्जन एवं सीएमएचओ द्वारा क्यों नहीं की जाती? ओपीडी के वक्त डॉक्टर घंटों देरी से अस्पताल क्यों आते हैं? करोड़ों का भव्य अस्पताल भवन क्या केवल देखकर मोबाइल पर फोटो कैद करने के लिये बनाया गया है? आखिरकार अस्पताल की बदहाल स्थिति क्यों नहीं सुधारी जा रही? ये तमाम सवाल आज जिले की जनता डॉक्टरों एवं जिम्मेदार प्रशासन से पूछ रही है।




