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गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों के खाते में 11वीं और 12वीं किश्त के रूप में 7.53 करोड़ रूपए की राशि अंतरित, बेहतर बाजार दिलाने अब शुरू होंगे ‘‘सीजी मार्ट‘‘ -सीएम भूपेश बघेल

एक ही छत के नीचे मिलेंगे महिला समूहों द्वारा तैयार विशिष्ट उत्पाद, मुख्यमंत्री ने गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों के खाते में 11वीं और 12वीं किश्त के रूप में 7.53 करोड़ रूपए की राशि अंतरित की, गोधन न्याय योजना से हितग्राहियों को अब तक 71.72 करोड़ रूपए का भुगतान , गोधन न्याय योजना के 1.45 लाख हितग्राहियों में 57 हजार से ज्यादा भूमिहीन किसान

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गौठानों में महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों, वन क्षेत्रों के समूहों द्वारा लघु वनोपज के प्रसंस्करण से तैयार किए जा रहे उत्पादों जैसे शहद, वनौषधि, बस्तर शिल्प की कलाकृतियां, हैण्डलूम वस्त्र, कोसा वस्त्र जैसे विशिष्ट उत्पाद शहरी क्षेत्रों में एक ही छत के नीचे बिक्री के लिए उपलब्ध कराने के लिए ‘‘सीजी मार्ट‘‘ प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सीजी मार्ट में महिलाओं के उत्पादों की बिक्री हो और इसका लाभ उन्हें मिले। उन्होंने कहा कि सीजी मार्ट पहले राजधानी रायपुर, फिर संभाग और जिला स्तर पर प्रारंभ किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सीजी मार्ट में तेलघानी से सरसों, अलसी, राई आदि के तेल भी बिक्री के लिए रखे जाए। उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा हाल में ही तेलघानी बोर्ड के गठन का फैसला लिया गया है।

मुख्यमंत्री अपने निवास कार्यालय में आयोजित समारोह में गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को ग्यारहवीं एवं बारहवीं किश्त की राशि अंतरण के बाद संबोधित कर रहे थे। उन्होंने गोबर विक्रेताओं को ग्यारहवीं किश्त के रूप में 16 से 31 दिसम्बर तक गोबर बिक्री की राशि 4.51 करोड़ रूपए और बारहवीं किश्त के रूप में 01 जनवरी से 15 जनवरी तक की राशि 3.02 करोड़ रूपए इस प्रकार कुल 7.53 करोड़ रूपए की राशि गोबर विक्रेताओं के खाते में ऑनलाइन अंतरित की। इसे मिलाकर अब तक गोधन न्याय योजना के अंतर्गत किसानों और पशुपालकों को 71 करोड़ 72 लाख रूपए की राशि दी जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि गोधन न्याय योजना से लाभान्वित होने वाले हितग्राहियों में से 57 हजार से अधिक हितग्राही भूमिहीन कृषक है। जिन्हें गोबर की बिक्री से आय का एक अच्छा साधन मिला है। गोधन न्याय योजना की परिकल्पना के अनुरूप साधनहीन और भूमिहीनों को न्याय मिला है। अब तक इस योजना में 35 लाख 86 हजार क्विंटल गोबर की खरीदी की जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी सुराजी गांव योजना नरवा, गरवा, घुरूवा, बाड़ी के अंतर्गत विकसित किए जा रहे गौठानों के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। प्रदेश में 3 हजार 851 सक्रिय गौठान है जिनमें महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं गोबर से वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर रही है। एक समूह में लगभग 10 महिलाएं होती है, इस तरह केवल वर्मी कम्पोस्ट से ही 38 हजार 510 महिलाओं को आय का साधन मिला है।

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