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इस दीपावली गोबर से बने दीएं करेंगें घरों को रोशन

सरकार की महत्वपूर्ण योजना गोधन न्याय योजना के माध्यम से आसानी से गोबर उपलब्ध होने की वजह से इससे वर्मी कम्पोस्ट बनाने के अलावा नए प्रयोग किए जा रहे है, जो कि पर्यावरण के अनूकुल होने के साथ ही रोजगार का माध्यम भी बन रहा है। जिला सुकमा के स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के द्वारा राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर गोबर से दीये बनाने का काम किया जा रहा है। जो नगर में ही नहीं बस्तर के विभिन्न हिस्सों को दीपावली में घरों को रोशन करेंगे। सुकमा नगर पालिका क्षेत्र के कुम्हारास कि चार समूहों की महिलाएं गोबर से दीया बनाने के कार्य में जुट गई हैं।

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स्व-सहायता समूहों गंगाजनी, महालक्ष्मी, बम्लेश्वरी और मां अम्बे से जुड़ी महिलाएं अपने दैनिक कार्यों से थोड़ा समय निकालकर इन दीयों को आकार दे रहीं हैं। बम्लेश्वरी समूह से जुड़ी श्रीमती सनमती पांडे ने बताया कि उन्हें दीये बनाने में बहुत खुशी हो रही है। महिलाओं ने इस बात पर हर्ष जताया कि दीया बनाने से आर्थिक लाभ के साथ ही उनके घरों में भी दीपावली की खुशियां दोगुनी हो जाएंगी। महालक्ष्मी समूह से जुड़ी श्रीमती सुदन पांडे ने बताया कि उन्होंने आपस में ही प्रति महिला प्रतिदिन 100 दीये बनाने का लक्ष्य रखा है, इस प्रकार यदि 10 महिलाएं भी एक साथ दीये बनाएं तो प्रतिदिन 1000 दीयों को अपने हाथों से आकार दे पाएंगी। उन्होंने बताया कि सुबह सभी महिलाएं अपने घर के दैनिक कार्यों को पूरा कर अपने मोहल्ले के इमली पेड़ की छांव में एकत्रित हो जाती हैं। वहां वे दीये बनाने का कार्य करती हैं।

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कुम्हारास के मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने बताया कि इस वर्ष दीपावली त्योहार के लिए मिट्टी एवं गोबर की सहायता से शहर के महिला स्व सहायता समूहो के माध्यम से दीये तैयार करने तथा उनके विक्रय की व्यवस्था किया जाना है, इसी क्रम में समूह की महिलाओं को गोबर एवं मिट्टी से दीये बनाने का प्रशिक्षण राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के माध्यम से दिया गया। जिसमे प्रारंभिक स्तर पर गोबर से निर्मित 8000 दीये तैयार करने करने का कार्य महिला समूहों द्वारा किया जा रहा है।

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